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'चिल्ड्रन ऑफ ब्लड एंड बोन': एमवीएएएफएफ में जीना प्रिंस-बाइटवुड ने पेश की अफ्रीकी फैंटेसी की पहली झलक
ICN24 Newsroom 9 अग॰ 2026, 12:37 pm

निर्देशक जीना प्रिंस-बाइटवुड और अभिनेत्री थुसो म्बेडु ने एमवीएएएफएफ में 'चिल्ड्रन ऑफ ब्लड एंड बोन' की विशेष झलक साझा की, जो वैश्विक सिनेमा में विविधता का नया अध्याय है।
मार्था वाइनयार्ड अफ्रीकन अमेरिकन फिल्म फेस्टिवल (MVAAFF) के 24वें वार्षिक आयोजन की उद्घाटन रात एक ऐतिहासिक क्षण की गवाह बनी। प्रसिद्ध निर्देशक जीना प्रिंस-बाइटवुड और उभरती हुई स्टार थुसो म्बेडु ने अपनी आगामी महाकाव्य फिल्म 'चिल्ड्रन ऑफ ब्लड एंड बोन' (Children of Blood and Bone) के कभी न देखे गए क्लिप साझा किए। यह फिल्म टौमी अडेयेमी के इसी नाम के प्रशंसित उपन्यास पर आधारित है और इसे वैश्विक सिनेमा में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान प्रिंस-बाइटवुड ने फिल्म निर्माण की चुनौतियों और इसके महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा, "जाहिर है कि इस तरह की फिल्में अक्सर नहीं बनतीं।" उनकी यह टिप्पणी हॉलीवुड में बड़े बजट की उन फिल्मों की कमी की ओर इशारा करती है जो पश्चिमी जगत से बाहर की कहानियों और संस्कृतियों पर आधारित होती हैं। यह फिल्म एक ऐसी दुनिया को चित्रित करती है जहाँ जादू को दबा दिया गया है और एक युवा लड़की इसे वापस लाने के लिए संघर्ष करती है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह विकास विशेष रूप से प्रासंगिक है। ऑस्ट्रेलिया में दक्षिण एशियाई प्रवासियों की बढ़ती संख्या के साथ, ऐसी कहानियों की मांग बढ़ी है जो उनकी अपनी जड़ों और लोककथाओं को बड़े पर्दे पर प्रतिबिंबित करती हों। जिस तरह 'चिल्ड्रन ऑफ ब्लड एंड बोन' अफ्रीकी पौराणिक कथाओं को मुख्यधारा में ला रही है, उसी तरह 'ब्रह्मास्त्र' और 'कल्कि 2898 एडी' जैसी भारतीय फिल्मों ने भी वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। यह फिल्म दर्शाती है कि अब दर्शक केवल पारंपरिक पश्चिमी कहानियों तक सीमित नहीं रहना चाहते।
प्रिंस-बाइटवुड, जिन्होंने 'द वुमन किंग' जैसी सफल फिल्मों का निर्देशन किया है, ने इस बात पर जोर दिया कि इस परियोजना के लिए सही विजन का होना जरूरी था। उन्होंने मूल लेखिका टौमी अडेयेमी के साथ मिलकर काम करने के अनुभव को साझा किया, ताकि फिल्म की आत्मा उपन्यास के प्रति वफादार रहे। थुसो म्बेडु, जो फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रही हैं, ने भी अपने पात्र के साथ जुड़ाव और स्क्रीन पर प्रतिनिधित्व के महत्व के बारे में बात की।
मेलबर्न और सिडनी जैसे ऑस्ट्रेलियाई शहरों में रहने वाले भारतीय मूल के फिल्म प्रेमियों के लिए, यह फिल्म प्रतिनिधित्व (representation) की उस बड़ी लड़ाई का हिस्सा है जो वैश्विक मनोरंजन उद्योग में चल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि 'चिल्ड्रन ऑफ ब्लड एंड बोन' की सफलता अन्य संस्कृतियों, जिनमें भारतीय पौराणिक कथाएं भी शामिल हैं, के लिए हॉलीवुड में बड़े बजट की परियोजनाओं के द्वार खोल सकती है। यह फिल्म न केवल एक मनोरंजन का साधन है, बल्कि यह पहचान और सांस्कृतिक गर्व का प्रतीक भी बनकर उभर रही है।
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