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G7 शिखर सम्मेलन: ट्रंप और ईरान के मुद्दों के बीच वैश्विक नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक

ICN24 Newsroom 15 जून 2026, 04:31 pm
G7 शिखर सम्मेलन: ट्रंप और ईरान के मुद्दों के बीच वैश्विक नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक

फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और समुद्री व्यापार मार्गों को सुरक्षित करने पर जोर दिया है।

फ्रांस के तटीय शहर बियारिट्ज़ में आयोजित सात देशों के समूह (G7) के शिखर सम्मेलन में वैश्विक राजनीति के सबसे जटिल मुद्दे केंद्र में रहे। इस बार के सम्मेलन की चर्चा का मुख्य बिंदु अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां और ईरान के साथ बढ़ते तनाव को कम करना है। मेजबान देश फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने राजनयिक प्रयासों को तेज करते हुए उम्मीद जताई है कि प्रमुख वैश्विक नेता ईरान के साथ एक समझौते पर पहुंचने की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे। मैक्रों के अनुसार, इस शिखर सम्मेलन का एक मुख्य उद्देश्य ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक रूपरेखा तैयार करना है। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लंबी अवधि के लिए फिर से खोलने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए सुरक्षित बनाने का मुद्दा सबसे ऊपर है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए जीवन रेखा माना जाता है और इसके बंद होने या बाधित होने से भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई प्रवासियों सहित दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतों पर सीधा असर पड़ता है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है। ऑस्ट्रेलिया और भारत दोनों ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और स्वतंत्र व्यापार मार्गों के कट्टर समर्थक हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार की अस्थिरता से न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित होती है, बल्कि ऑस्ट्रेलिया के आर्थिक हितों और वैश्विक बाजार की स्थिरता पर भी प्रभाव पड़ता है। सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप की उपस्थिति ने चर्चाओं में एक नया मोड़ दिया है। जहां अन्य सदस्य देश 2015 के परमाणु समझौते को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं ट्रंप प्रशासन की 'अधिकतम दबाव' वाली नीति ने ईरान के साथ संबंधों को तनावपूर्ण बना रखा है। मैक्रों ने एक मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए दोनों पक्षों के बीच संवाद का रास्ता खोलने की कोशिश की है ताकि खाड़ी क्षेत्र में किसी भी संभावित सैन्य टकराव को टाला जा सके। निष्कर्षतः, G7 की यह बैठक केवल विकसित देशों का जमावड़ा नहीं है, बल्कि यह आने वाले समय में वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक नीतियों की दिशा तय करेगी। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के दृष्टिकोण से, इन वार्ताओं का परिणाम न केवल पेट्रोल-डीजल की कीमतों को प्रभावित करेगा, बल्कि यह पश्चिम एशिया में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए भी आवश्यक है, जहां भारत के गहरे रणनीतिक हित जुड़े हुए हैं।
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