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राष्ट्रपति मुर्मू के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में गूंजा 'वन्दे मातरम', राष्ट्रगीत के ऐतिहासिक महत्व पर दिया जोर

ICN24 Newsroom 15 अग॰ 2026, 05:37 am
राष्ट्रपति मुर्मू के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में गूंजा 'वन्दे मातरम', राष्ट्रगीत के ऐतिहासिक महत्व पर दिया जोर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के स्वतंत्रता दिवस संबोधन के दौरान राष्ट्रगीत 'वन्दे मातरम' का पूर्ण गायन किया गया, जो भारतीय स्वाधीनता संग्राम की अटूट भावना का प्रतीक है।

भारत के 78वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक नई परंपरा और गहरे सांस्कृतिक गौरव का परिचय दिया। इस विशेष अवसर पर राष्ट्रपति के भाषण से पहले और बाद में राष्ट्रगीत 'वन्दे मातरम' का पूर्ण गायन किया गया। राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में विशेष रूप से इस बात को रेखांकित किया कि किस प्रकार 'वन्दे मातरम' ने भारत के स्वाधीनता संग्राम के दौरान लाखों देशवासियों को एकजुट करने और उनमें देशभक्ति की ज्वाला प्रज्वलित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। राष्ट्रपति ने अपने संदेश में स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि यह गीत केवल एक रचना नहीं, बल्कि औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध भारतीय प्रतिरोध की आत्मा थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि 'वन्दे मातरम' के उद्घोष ने देश के हर कोने में राष्ट्रवाद की लहर पैदा की थी, जिसने अंततः भारत को स्वतंत्र कराया। यह पहली बार देखा गया जब राष्ट्रपति के संबोधन के आधिकारिक औपचारिक ढांचे में राष्ट्रगीत के पूर्ण संस्करण को इतनी प्रमुखता दी गई, जो राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सरकार और प्रशासन के गहरे सम्मान को दर्शाता है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह क्षण विशेष भावनात्मक महत्व रखता है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में बसे भारतीय प्रवासियों के लिए स्वतंत्रता दिवस केवल एक कैलेंडर तिथि नहीं, बल्कि अपनी जड़ों से दोबारा जुड़ने का अवसर होता है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के बीच 'वन्दे मातरम' और तिरंगे के प्रति सम्मान उनकी सांस्कृतिक पहचान का एक अनिवार्य हिस्सा है। इस तरह के प्रतीकात्मक कदम विदेशों में रह रहे भारतीयों को अपनी विरासत पर गर्व करने का एक नया कारण देते हैं। अपने विस्तृत संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने भारत की प्रगति के विभिन्न आयामों पर भी चर्चा की। उन्होंने सामाजिक न्याय, समावेशी विकास और महिला सशक्तिकरण (नारी शक्ति) को आधुनिक भारत की आधारशिला बताया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत तेजी से एक विकसित राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर है। 'वन्दे मातरम' की गूँज के बीच दिया गया यह भाषण न केवल ऐतिहासिक उपलब्धियों का स्मरण था, बल्कि भविष्य के समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत का एक संकल्प भी था। संबोधन का समापन करते हुए राष्ट्रपति ने नागरिकों से आह्वान किया कि वे देश की अखंडता और एकता को बनाए रखें। राष्ट्रगीत के पूर्ण गायन ने पूरे कार्यक्रम को एक गरिमामयी और भावुकतापूर्ण वातावरण प्रदान किया, जिसने देश के भीतर और दुनिया भर में फैले भारतीय प्रवासियों को राष्ट्र प्रथम की भावना से ओतप्रोत कर दिया।
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