लाइव
विज्ञापन
Demo Interstitial - Migration Consultancy
ब्रेकिंग न्यूज़
ब्रेकिंग न्यूज़ब्रेकिंग

'स्वस्थ' भोजन के नाम पर ग्राहकों को गुमराह करना बंद करें: FSSAI ने कंपनियों को दी कड़ी चेतावनी

ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 09:55 pm
'स्वस्थ' भोजन के नाम पर ग्राहकों को गुमराह करना बंद करें: FSSAI ने कंपनियों को दी कड़ी चेतावनी

FSSAI ने खाद्य उत्पादों पर 'प्राकृतिक' और 'चीनी मुक्त' जैसे भ्रामक दावों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। यह कदम उपभोक्ता जागरूकता और बढ़ते विरोध के बाद उठाया गया है।

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने देश के खाद्य उद्योग में बढ़ते भ्रामक विज्ञापनों और स्वास्थ्य संबंधी दावों के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू किया है। हाल के महीनों में कई बड़ी कंपनियों द्वारा अपने उत्पादों को 'प्राकृतिक', 'स्वस्थ', और 'बिना अतिरिक्त चीनी' (no added sugar) वाला बताकर बेचने के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। FSSAI का मानना है कि ये दावे अक्सर उपभोक्ताओं को गुमराह करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं, जबकि उत्पाद की वास्तविक सामग्री कुछ और ही कहानी बयां करती है। नियामक संस्था का यह कड़ा रुख सोशल मीडिया पर बढ़ती सक्रियता और उपभोक्ताओं की शिकायतों के बाद आया है। विशेष रूप से, हाल ही में 'फूड इन्फ्लुएंसर्स' ने लोकप्रिय बोर्नविटा जैसे पेय पदार्थों और अन्य पैकेट बंद खाद्य पदार्थों में चीनी की उच्च मात्रा को उजागर किया था। इसके बाद, FSSAI ने सभी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे अपने उत्पादों के वर्गीकरण में सुधार करें। उदाहरण के लिए, अब किसी भी पेय पदार्थ को 'हेल्थ ड्रिंक' के रूप में नहीं बेचा जा सकता क्योंकि भारतीय कानून में ऐसी कोई आधिकारिक श्रेणी नहीं है। आस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया में बड़ी मात्रा में भारतीय पैकेट बंद खाद्य पदार्थ, जैसे कि अचार, नमकीन, मसालों के मिश्रण और सप्लीमेंट्स आयात किए जाते हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में भारतीय ग्रोसरी स्टोर्स पर मिलने वाले इन उत्पादों के लेबल पर लिखे दावों को लेकर अब प्रवासी भारतीयों को भी सतर्क रहने की आवश्यकता है। हालांकि ऑस्ट्रेलिया में 'फूड स्टैंडर्ड्स ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड' (FSANZ) के कड़े नियम लागू हैं, लेकिन मूल देश (भारत) में लेबलिंग नियमों में बदलाव का सीधा असर यहां मिलने वाले उत्पादों की पारदर्शिता पर पड़ेगा। FSSAI ने कंपनियों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे भ्रामक शब्दों का प्रयोग तुरंत बंद करें। '100% फ्रूट जूस' जैसे दावों पर भी कैंची चलाई गई है, क्योंकि कई ब्रांड सांद्रता (concentrates) का उपयोग करते हैं और फिर भी उन्हें शत-प्रतिशत प्राकृतिक बताते हैं। नियामक ने कहा है कि यदि कोई उत्पाद 'बिना अतिरिक्त चीनी' का दावा करता है, लेकिन उसमें प्राकृतिक रूप से उच्च मात्रा में सुक्रोज या फ्रुक्टोज मौजूद है, तो उसे स्पष्ट रूप से लेबल पर अंकित करना होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल जुर्माना लगाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उपभोक्ताओं को जागरूक करने की भी जरूरत है। ICN24 अपने पाठकों को सलाह देता है कि वे पैकेट के सामने लिखे चमकीले विज्ञापनों के बजाय पैकेट के पीछे दी गई 'न्यूट्रिशनल वैल्यू' (पोषण संबंधी जानकारी) को पढ़ना शुरू करें। विज्ञापन अक्सर केवल आधी सच्चाई बताते हैं, जबकि सामग्री की सूची (Ingredients list) उत्पाद की असलियत उजागर करती है। आने वाले दिनों में, FSSAI कई और श्रेणियों में सख्त मानकों को लागू करने की तैयारी में है ताकि आम आदमी की थाली को सुरक्षित रखा जा सके।
शेयर:

संबंधित ख़बरें

खबर हटके: गर्मी में गमछा लहराया तो रुकी ट्रेन, मेट्रो में बंदर का सफर और 10 साल बाद मिली अंगूठी
ब्रेकिंगब्रेकिंग

खबर हटके: गर्मी में गमछा लहराया तो रुकी ट्रेन, मेट्रो में बंदर का सफर और 10 साल बाद मिली अंगूठी

उत्तर प्रदेश से लेकर अमेरिका तक, आज की 'खबर हटके' में पढ़िए ट्रेन रुकने के अजीब कारण, मेट्रो में बंदर की मस्ती और एक अमीर माली की दिलचस्प कहानी।

20 जून 2026, 11:55 pm
पीएम मोदी एक 'मंझे हुए खिलाड़ी', ट्रंप ने भारतीय प्रधानमंत्री को बताया अपना सबसे पसंदीदा नेता
ब्रेकिंगब्रेकिंग

पीएम मोदी एक 'मंझे हुए खिलाड़ी', ट्रंप ने भारतीय प्रधानमंत्री को बताया अपना सबसे पसंदीदा नेता

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी की जमकर प्रशंसा की है। उन्होंने मोदी को एक मजबूत और चतुर नेता बताते हुए अपने पसंदीदा वैश्विक नेताओं में शुमार किया है।

20 जून 2026, 11:40 pm
सीबीएसई डिजिटल मार्किंग प्रणाली के भविष्य पर छात्रों और अभिभावकों से लेगा राय; तकनीकी खामियों के बाद समीक्षा शुरू
ब्रेकिंगब्रेकिंग

सीबीएसई डिजिटल मार्किंग प्रणाली के भविष्य पर छात्रों और अभिभावकों से लेगा राय; तकनीकी खामियों के बाद समीक्षा शुरू

सीबीएसई अपनी 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' प्रणाली की समीक्षा करेगा। 2027 की परीक्षाओं और कक्षा 10वीं में इसके विस्तार से पहले बोर्ड छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से सुझाव मांगेगा।

20 जून 2026, 11:10 pm
Original text
Rate this translation
Your feedback will be used to help improve Google Translate