इमिकास्ट
7 साल का लंबा इंतज़ार और फिर अरबों का साम्राज्य: IIT दिल्ली के ज्योति बंसल की प्रेरक कहानी
ICN24 Newsroom 14 जून 2026, 05:01 am
IIT दिल्ली के पूर्व छात्र ज्योति बंसल को अमेरिका में अपना स्टार्टअप शुरू करने के लिए 7 साल तक वीज़ा का इंतज़ार करना पड़ा। आज उनकी कुल संपत्ति 2.3 बिलियन डॉलर से अधिक है।
सफलता अक्सर रातों-रात नहीं मिलती, बल्कि इसके पीछे वर्षों का धैर्य और संघर्ष छिपा होता है। भारतीय मूल के उद्यमी ज्योति बंसल की कहानी इसका जीवंत उदाहरण है। आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) के इस पूर्व छात्र ने अमेरिका में अपना स्टार्टअप शुरू करने के लिए सात लंबे वर्षों तक इंतज़ार किया। आज, वह 2.3 बिलियन डॉलर (लगभग 19,000 करोड़ रुपये) से अधिक की संपत्ति के मालिक हैं। उनकी यह यात्रा न केवल तकनीकी जगत के लिए, बल्कि ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे देशों में रह रहे उन हज़ारों प्रवासी भारतीयों के लिए भी एक बड़ी प्रेरणा है जो वीज़ा की जटिलताओं से जूझ रहे हैं।
ज्योति बंसल की कहानी 1999 में शुरू हुई जब उन्होंने आईआईटी दिल्ली से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। कंप्यूटर साइंस में अपनी प्रतिभा के दम पर वे अमेरिका के सिलिकॉन वैली पहुंचे। उनके मन में हमेशा से अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने का विचार था, लेकिन एक बड़ी बाधा उनके रास्ते में खड़ी थी—अमेरिकी इमिग्रेशन कानून। एच-1बी (H-1B) वीज़ा पर होने के कारण वे कानूनी रूप से अपनी कंपनी शुरू नहीं कर सकते थे। अपनी खुद की कंपनी का मालिक बनने के लिए उन्हें 'ग्रीन कार्ड' यानी स्थायी निवास की आवश्यकता थी, जिसके लिए उन्हें सात साल तक इंतज़ार करना पड़ा।
इस लंबी प्रतीक्षा के दौरान, बंसल ने हार नहीं मानी। उन्होंने विभिन्न टेक कंपनियों में काम करते हुए अपने कौशल को निखारा और अपने विचारों पर काम जारी रखा। अंततः, 2008 में जब उन्हें अपना वर्क ऑथराइजेशन प्राप्त हुआ, तो उन्होंने 'ऐपडायनामिक्स' (AppDynamics) की नींव रखी। यह एक ऐसा सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म था जो कंपनियों को उनके एप्लिकेशन के प्रदर्शन की निगरानी करने में मदद करता था। हालांकि, शुरुआत आसान नहीं थी। उन्हें कई निवेशकों से इनकार का सामना करना पड़ा और आर्थिक मंदी के दौर में फंडिंग जुटाना एक बड़ी चुनौती थी।
बंसल की मेहनत तब रंग लाई जब ऐपडायनामिक्स दुनिया की अग्रणी सॉफ्टवेयर कंपनियों में से एक बन गई। 2017 में, जब कंपनी अपना आईपीओ (IPO) लाने वाली थी, उससे ठीक पहले दिग्गज टेक कंपनी 'सिस्को' (Cisco) ने इसे 3.7 बिलियन डॉलर में खरीद लिया। इस सौदे ने बंसल को वैश्विक स्तर पर एक सफल उद्यमी के रूप में स्थापित कर दिया। वर्तमान में, वे 'हार्नेस' (Harness) और 'अनयूजुअल वेंचर्स' (Unusual Ventures) जैसी नई कंपनियों के माध्यम से तकनीकी नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए, बंसल की यह सफलता विशेष महत्व रखती है। ऑस्ट्रेलिया में भी कई कुशल भारतीय पेशेवर इसी तरह की वीज़ा श्रेणियों (जैसे सबक्लास 482 या 189) के तहत काम करते हैं और अक्सर पीआर (स्थायी निवास) की प्रतीक्षा में अपने उद्यमशीलता के सपनों को रोक देते हैं। बंसल की कहानी यह सिखाती है कि वीज़ा की बाधाएं केवल अस्थायी रुकावटें हैं। सही दृष्टि और दृढ़ संकल्प के साथ, प्रवासी अपनी सीमाओं से परे जाकर वैश्विक स्तर पर अपना नाम बना सकते हैं। उनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि यदि आपमें धैर्य है, तो सफलता के द्वार एक न एक दिन अवश्य खुलते हैं।
संबंधित ख़बरें
इमिग्रेशन
यूएई में भारतीय पासपोर्ट और वीजा सेवाओं पर 5 दिनों का विराम, 26 जून से सेवाएं रहेंगी निलंबित
यूएई में भारतीय मिशनों ने पासपोर्ट और वीजा सेवाओं में बदलाव की घोषणा की है। 26 से 30 जून तक सेवाएं बंद रहेंगी और 1 जुलाई से नया प्रदाता कार्यभार संभालेगा।
20 जून 2026, 12:23 pm

इमिग्रेशन
ईरान की फीफा से शिकायत: विश्व कप के दौरान अमेरिकी यात्रा प्रतिबंधों पर जताया कड़ा विरोध
ईरानी फुटबॉल महासंघ ने 2026 विश्व कप के दौरान अमेरिका की वीजा पाबंदियों के खिलाफ फीफा में शिकायत दर्ज करने की घोषणा की है। कोच ने टीम को 'सबसे उत्पीड़ित' बताया।
20 जून 2026, 12:09 pm

इमिग्रेशन
कैलाश मानसरोवर यात्रा: सरकार ने नाथू ला और लिपुलेख ला चेक पोस्ट को दी आधिकारिक मंजूरी
भारत सरकार ने 20 जून से शुरू होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए सिक्किम के नाथू ला और उत्तराखंड के लिपुलेख ला को अस्थायी आव्रजन चौकियों के रूप में अधिसूचित किया है।
20 जून 2026, 11:52 am

