राजनीति
जंतर-मंतर से संसद तक: प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच लुका-छिपी का खेल, लाठीचार्ज के बावजूद डटे रहे लोग
ICN24 Newsroom 21 जुल॰ 2026, 10:35 am
नई दिल्ली के जंतर-मंतर से संसद की ओर कूच कर रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच भारी गतिरोध देखा गया, जहां बार-बार होते लाठीचार्ज के बाद भी भीड़ पीछे हटने को तैयार नहीं थी।
नई दिल्ली के ऐतिहासिक विरोध स्थल जंतर-मंतर से संसद भवन की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच आज भारी तनाव का माहौल रहा। जो मार्च एक शांतिपूर्ण विरोध के रूप में शुरू हुआ था, उसने जल्द ही एक आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया, जिससे राष्ट्रीय राजधानी का मध्य क्षेत्र संघर्ष के मैदान में तब्दील हो गया। पुलिस द्वारा भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बार-बार बल प्रयोग किया गया, लेकिन प्रदर्शनकारियों के संकल्प ने सुरक्षा व्यवस्था को कड़ी चुनौती दी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्थिति हर आधे घंटे में एक निश्चित पैटर्न पर चलती रही। जैसे ही प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़ने के लिए लगाए गए बैरिकेड्स को पार करने की कोशिश करते, पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज कर दिया। लाठीचार्ज होते ही भीड़ एक बार पीछे हटती, लेकिन तितर-बितर होने के बजाय, प्रदर्शनकारी कुछ ही मिनटों में फिर से एकजुट हो जाते और नए सिरे से पुलिस के घेरे को तोड़ने का प्रयास करते। यह चक्र घंटों तक चलता रहा, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि इस मार्च ने अपनी एक स्वतंत्र और अडिग पहचान बना ली है।
सड़कों पर अराजकता के बीच, प्रदर्शनकारियों के नारों और पुलिस की सायरनों की आवाज गूंजती रही। सुरक्षा बलों ने न केवल लाठियों का सहारा लिया, बल्कि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन (पानी की बौछार) का भी उपयोग करने की तैयारी की थी। हालांकि, भीड़ की संख्या और उनके दोबारा संगठित होने की क्षमता ने पुलिस की रणनीति को बार-बार विफल किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनका यह मार्च उनके अधिकारों की लड़ाई है और वे किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेंगे।
इस घटनाक्रम का प्रभाव केवल भारत तक ही सीमित नहीं है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के बीच भी दिल्ली की इन हलचलों को लेकर काफी उत्सुकता और चिंता देखी जा रही है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसे प्रवासी भारतीय सोशल मीडिया के माध्यम से इन प्रदर्शनों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय अक्सर भारत के लोकतांत्रिक आंदोलनों को अपनी जड़ों से जुड़ाव के रूप में देखता है और इस तरह के नागरिक विरोध प्रदर्शन वहां के सामुदायिक चर्चाओं का मुख्य हिस्सा बन जाते हैं।
फिलहाल, दिल्ली पुलिस ने संसद की ओर जाने वाले सभी रास्तों को सील कर दिया है और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। हालांकि शाम होते-होते झड़पों की तीव्रता कम हुई है, लेकिन जंतर-मंतर पर अभी भी प्रदर्शनकारियों का जमावड़ा बना हुआ है। यह विरोध मार्च इस बात का प्रमाण है कि जब जनभावनाएं उग्र होती हैं, तो प्रशासनिक सख्ती भी उन्हें रोकने में संघर्ष करती है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच संवाद का क्या रास्ता निकलता है।
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