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फीफा विश्व कप वीजा विवाद: अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने आलोचनाओं को किया खारिज, कहा- 'शांति रखें'

ICN24 Newsroom 11 जून 2026, 04:30 pm
फीफा विश्व कप वीजा विवाद: अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने आलोचनाओं को किया खारिज, कहा- 'शांति रखें'

फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने आगामी विश्व कप के लिए वीजा संबंधी दिक्कतों पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि संगठन सरकारी नियमों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता।

विश्व फुटबॉल की शासी निकाय, फीफा (FIFA) को आगामी विश्व कप की तैयारियों के बीच बढ़ते वीजा विवादों का सामना करना पड़ रहा है। कई देशों के रेफरी, स्टाफ और प्रशंसकों को वीजा मिलने में आ रही बाधाओं के बावजूद, फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने इस मुद्दे पर बेहद बेबाक और कुछ हद तक बेपरवाह रुख अपनाया है। उन्होंने आलोचकों और प्रभावित पक्षों को सुझाव दिया है कि वे इस स्थिति को लेकर 'शांत रहें और तनाव न लें'। हाल के दिनों में वीजा से जुड़ी समस्याओं ने तब सुर्खियां बटोरीं जब ईरान के सहयोगी स्टाफ और एक प्रमुख वर्ल्ड कप रेफरी को प्रवेश देने से मना कर दिया गया। इस घटनाक्रम ने फुटबॉल जगत में हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि खेल आयोजनों में आमतौर पर मेजबान देशों से प्रतिभागियों के लिए विशेष छूट की अपेक्षा की जाती है। हालांकि, इन्फेंटिनो ने स्पष्ट कर दिया है कि फीफा के पास राष्ट्रीय सरकारों की आव्रजन नीतियों (Immigration Policies) को बदलने या उनमें हस्तक्षेप करने की कोई शक्ति नहीं है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय और फुटबॉल प्रशंसकों के लिए यह खबर विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया में एक बड़ी आबादी भारतीय प्रवासियों की है जो अक्सर अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के लिए दुनिया भर की यात्रा करते हैं। वीजा नियमों की सख्ती और फीफा के इस 'हाथ खींचने' वाले रवैये का सीधा असर उन प्रशंसकों पर पड़ सकता है जो टूर्नामेंट के लिए यात्रा की योजना बना रहे हैं। इन्फेंटिनो के बयान ने उन समर्थकों के बीच चिंता बढ़ा दी है जो पहले से ही जटिल वीजा प्रक्रियाओं से जूझ रहे हैं। इन्फेंटिनो ने संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि फुटबॉल एक खेल है और इसे सीमाओं और कानूनों से ऊपर नहीं रखा जा सकता। उन्होंने तर्क दिया कि सुरक्षा और सीमा नियंत्रण पूरी तरह से सरकारों का विशेषाधिकार है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि फीफा केवल समन्वय का काम कर सकता है, लेकिन किसी को जबरन प्रवेश दिलाने की गारंटी नहीं दे सकता। आलोचकों का तर्क है कि फीफा जैसे बड़े संगठन को मेजबान देशों के साथ बेहतर तालमेल बिठाना चाहिए ताकि खिलाड़ियों और स्टाफ को किसी राजनीतिक या प्रशासनिक बाधा का सामना न करना पड़े। रेफरी और तकनीकी कर्मचारियों का प्रवेश रुकने से खेल की निष्पक्षता और गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। लेकिन फिलहाल, फीफा प्रमुख के 'चिल' रहने वाले संदेश ने आग में घी डालने का काम किया है, जिससे खेल प्रशासकों और मानवाधिकार समूहों के बीच तनाव और बढ़ सकता है।
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