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FBI की नई रिपोर्ट: अमेरिका में सिखों और हिंदुओं के खिलाफ बढ़े नफरती अपराध, 2025 के आंकड़े जारी
ICN24 Newsroom 19 अग॰ 2026, 01:37 pm

FBI के 2025 के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में सिखों के खिलाफ 189 और हिंदुओं के खिलाफ 32 नफरती अपराध दर्ज किए गए हैं, जो प्रवासी समुदायों के लिए चिंता का विषय है।
वाशिंगटन: संघीय जांच ब्यूरो (FBI) द्वारा जारी 2025 के वार्षिक आंकड़ों ने अमेरिका में रह रहे भारतीय मूल के समुदायों के बीच सुरक्षा चिंताओं को फिर से बढ़ा दिया है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में अमेरिका में सिखों के खिलाफ 189 और हिंदुओं के खिलाफ 32 नफरती अपराध (Hate Crimes) दर्ज किए गए। हालांकि कुल अपराधों की दर में गिरावट देखी गई है, लेकिन धार्मिक आधार पर लक्षित इन हमलों ने वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रवासियों को सतर्क कर दिया है।
FBI की रिपोर्ट में बताया गया है कि यह आंकड़े उन कानून प्रवर्तन एजेंसियों से प्राप्त किए गए हैं जिन्होंने वर्ष के दौरान निरंतर डेटा साझा किया है। तुलनात्मक विश्लेषण के लिए उपयोग किए गए एक अलग डेटासेट के अनुसार, अमेरिका में रिपोर्ट की गई कुल नफरती घटनाओं में 7 प्रतिशत की गिरावट आई है। यह संख्या 2024 में 11,404 से घटकर 2025 में 10,606 रह गई है। हालांकि, कुल आंकड़ों में कमी के बावजूद, दक्षिण एशियाई समुदायों, विशेष रूप से सिख समुदाय के खिलाफ अपराधों की संख्या अभी भी काफी अधिक बनी हुई है।
सिख समुदाय ऐतिहासिक रूप से अपनी विशिष्ट धार्मिक पहचान के कारण अमेरिका में घृणा अपराधों का शिकार होता रहा है। 189 दर्ज मामले यह दर्शाते हैं कि सार्वजनिक स्थानों और कार्यस्थलों पर सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा है। वहीं, हिंदू समुदाय के खिलाफ दर्ज 32 मामले धार्मिक असहिष्णुता के उभरते रुझानों की ओर इशारा करते हैं, जिनमें मंदिरों में तोड़फोड़ और नस्लीय टिप्पणियां शामिल हैं।
ऑस्ट्रेलियाई परिप्रेक्ष्य में, ये आंकड़े विशेष महत्व रखते हैं। पिछले कुछ वर्षों में ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न, सिडनी और ब्रिस्बेन जैसे शहरों में भी हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ और भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के खिलाफ लक्षित विरोध प्रदर्शन देखे गए हैं। हालांकि ऑस्ट्रेलियाई और अमेरिकी सुरक्षा तंत्र अलग हैं, लेकिन साझा की गई नफरती विचारधाराएं और सोशल मीडिया के माध्यम से फैलने वाला दुष्प्रचार दोनों देशों के भारतीय समुदायों के लिए एक जैसा खतरा पैदा करता है।
सामुदायिक संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने इन आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि रिपोर्ट किए गए मामले अक्सर वास्तविक संख्या से कम होते हैं। कई बार लोग कानूनी पचड़ों या भाषा की बाधा के कारण पुलिस के पास नहीं जाते। विशेषज्ञों का मानना है कि नफरती अपराधों से निपटने के लिए न केवल सख्त कानून बल्कि सामुदायिक जागरूकता और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय की आवश्यकता है।
ICN24 के माध्यम से हम अपने पाठकों को सलाह देते हैं कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि या घृणा आधारित घटना की सूचना तुरंत स्थानीय अधिकारियों को दें। वैश्विक स्तर पर बढ़ते ध्रुवीकरण के बीच, समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डेटा का सटीक संग्रहण और त्वरित कार्रवाई अनिवार्य है।
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