राजनीति
विशेष साक्षात्कार: फिल्मकार नानी सहरा वॉकर ने 'शक्ति' और नेपाल के विवादित '35-दिवसीय कानून' पर तोड़ी चुप्पी
ICN24 Newsroom 6 जुल॰ 2026, 05:31 pm

फिल्मकार नानी सहरा वॉकर ने अपनी फिल्म 'शक्ति' के माध्यम से नेपाल में यौन हिंसा के खिलाफ रिपोर्टिंग के लिए तय 35 दिनों की समय सीमा को चुनौती दी है।
फिल्म जगत में अक्सर ऐसी कहानियाँ सामने आती हैं जो न केवल मनोरंजन करती हैं, बल्कि समाज की गहरी कुरीतियों और अन्यायपूर्ण कानूनों को भी आईना दिखाती हैं। हाल ही में फिल्मकार नानी सहरा वॉकर ने अपनी नई परियोजना 'शक्ति' (Shakti) के माध्यम से एक ऐसे ही गंभीर विषय पर वैश्विक चर्चा छेड़ दी है। यह फिल्म नेपाल में यौन हिंसा के मामलों को दर्ज कराने के लिए निर्धारित 35 दिनों की बेहद कम कानूनी समय सीमा (Statute of Limitations) पर केंद्रित है। वॉकर का मानना है कि यदि हम इन विषयों पर बात नहीं करेंगे, तो बदलाव की उम्मीद करना बेमानी होगा।
नेपाल के मौजूदा कानून के अनुसार, यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को घटना के केवल 35 दिनों के भीतर ही अपनी शिकायत दर्ज करानी होती है। इस कानून की मानवाधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा लंबे समय से आलोचना की जा रही है। वॉकर बताती हैं कि यौन हिंसा के आघात (trauma) से उबरने और न्याय के लिए साहस जुटाने में अक्सर महीनों या सालों लग जाते हैं। ऐसे में 35 दिनों की यह सीमा न्याय के दरवाजे बंद करने जैसा है। अपनी फिल्म 'शक्ति' के जरिए उन्होंने इस जटिल प्रक्रिया और पीड़ितों के संघर्ष को संवेदनशीलता के साथ पर्दे पर उतारा है।
आईसीएन24 (ICN24) से विशेष बातचीत में वॉकर ने कहा कि इस फिल्म का उद्देश्य केवल एक कहानी सुनाना नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन को गति देना है। उन्होंने कहा, "मातृत्व ने मुझे इस विषय को देखने का एक नया नजरिया दिया है। एक माँ के रूप में, मैं यह सोचने पर मजबूर हो जाती हूँ कि हम आने वाली पीढ़ी के लिए कैसा समाज छोड़ रहे हैं। अगर हम आज खामोश रहे, तो यह चुप्पी ही हमारी सबसे बड़ी विफलता होगी।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बातचीत शुरू करना ही बदलाव की पहली सीढ़ी है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय और दक्षिण एशियाई समुदाय के लिए भी यह विषय काफी प्रासंगिक है। प्रवासी समुदायों में अक्सर यौन हिंसा और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बातों को 'पारिवारिक सम्मान' के नाम पर दबा दिया जाता है। वॉकर का मानना है कि कला और सिनेमा के माध्यम से हम इन वर्जनाओं को तोड़ सकते हैं। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में बसे दक्षिण एशियाई प्रवासियों के बीच भी इस फिल्म ने एक विमर्श पैदा किया है कि कैसे पितृसत्तात्मक कानून और सामाजिक शर्म पीड़ितों को न्याय से वंचित रखते हैं।
वॉकर के अनुसार, नेपाल जैसे देशों में जहाँ कानूनी सुधारों की गति धीमी है, वहाँ अंतरराष्ट्रीय दबाव और जागरूकता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। 'शक्ति' फिल्म न केवल एक पीड़ित की कहानी है, बल्कि यह उस लचीलेपन और ताकत का प्रतीक है जो एक महिला को न्याय की लड़ाई लड़ने के लिए प्रेरित करती है। फिल्मकार ने उम्मीद जताई कि इस फिल्म के माध्यम से नीति निर्माता और आम जनता इस अन्यायपूर्ण कानून के खिलाफ आवाज उठाएंगे और रिपोर्टिंग की समय सीमा को बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
संबंधित ख़बरें

राजनीति
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और बंगाल में हिंदू एकता का उदय: 1937 के चुनावों का ऐतिहासिक मोड़
1937 के बंगाल विधानसभा चुनावों ने भारतीय राजनीति की दिशा बदल दी। जानें कैसे कांग्रेस की अनिर्णय की स्थिति ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राजनीतिक उदय की नींव रखी।
6 जुल॰ 2026, 06:31 pm
राजनीति
डोनाल्ड ट्रंप ने साझा की बराक ओबामा की फर्जी तस्वीर, विमान पर 'अल्हम्दुलिल्लाह' और 'BLM' के आपत्तिजनक ग्रैफिटी
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर बराक ओबामा की एक कृत्रिम तस्वीर साझा की है, जिसमें विमान पर अरबी भाषा और ब्लैक लाइव्स मैटर के नारे लिखे दिखाई दे रहे हैं।
6 जुल॰ 2026, 04:31 pm

राजनीति
यूरेनियम, एआई और रक्षा: पीएम मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा भारत-प्रशांत क्षेत्र के लिए क्यों है अहम?
प्रधानमंत्री मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा का उद्देश्य एक दशक पुराने यूरेनियम समझौते को धरातल पर उतारना और रक्षा व एआई के क्षेत्रों में सहयोग को नया आयाम देना है।
6 जुल॰ 2026, 03:31 pm

