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कनाडा ने थॉमस पार्टी को प्रवेश देने से किया इनकार: वीजा नियमों और कानूनी विवाद ने बढ़ाईं मुश्किलें
ICN24 Newsroom 14 जून 2026, 06:31 pm

पूर्व आर्सेनल मिडफील्डर थॉमस पार्टी को कनाडा में प्रवेश से रोक दिया गया है। लंदन में लंबित कानूनी मामले और कड़े वीजा नियमों के कारण फीफा विश्व कप 2026 की सुरक्षा और निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
फुटबॉल जगत में उस वक्त हलचल मच गई जब पूर्व आर्सेनल स्टार और घाना के मिडफील्डर थॉमस पार्टी को कनाडा में प्रवेश करने से रोक दिया गया। फीफा ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि टोरंटो की यात्रा के दौरान पार्टी को देश में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। यह घटनाक्रम न केवल पार्टी के करियर के लिए एक झटका है, बल्कि यह 2026 फीफा विश्व कप के सह-मेजबान देशों के सख्त आव्रजन नियमों पर भी सवाल खड़ा करता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, थॉमस पार्टी को प्रवेश न देने का मुख्य कारण लंदन में उनके खिलाफ चल रहा एक लंबित कानूनी मामला बताया जा रहा है। कनाडा के आव्रजन कानून उन व्यक्तियों के प्रति अत्यंत सख्त हैं जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड हो या जिनके खिलाफ विदेशी धरती पर गंभीर कानूनी कार्रवाई चल रही हो। हालांकि पार्टी की कानूनी टीम इन आरोपों का बचाव कर रही है, लेकिन कनाडाई अधिकारियों ने राष्ट्रीय नियमों का हवाला देते हुए उन्हें सीमा पार करने से रोक दिया।
यह मामला अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है। 2026 विश्व कप की मेजबानी कनाडा, अमेरिका और मैक्सिको संयुक्त रूप से कर रहे हैं। इस घटना ने एथलीटों, प्रशंसकों और अधिकारियों के बीच इस बात को लेकर बहस छेड़ दी है कि क्या कड़े वीजा नियम भविष्य में अन्य खिलाड़ियों की भागीदारी को भी प्रभावित कर सकते हैं। फीफा के लिए यह एक कूटनीतिक चुनौती है, क्योंकि उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि मेजबान देशों के राष्ट्रीय कानून खेल की भावना और खिलाड़ियों की पहुंच में बाधा न बनें।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह खबर विशेष रूप से प्रासंगिक है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया में भी आव्रजन नियम (Character Requirements) काफी सख्त हैं। ऑस्ट्रेलिया के माइग्रेशन एक्ट की धारा 501 के तहत, किसी भी व्यक्ति का वीजा केवल संदेह या चल रहे कानूनी मामलों के आधार पर रद्द किया जा सकता है। थॉमस पार्टी का मामला यह दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय एथलीट भी इन कड़े कानूनों से ऊपर नहीं हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि फीफा और मेजबान देश इन मुद्दों का समाधान नहीं निकालते हैं, तो 2026 के टूर्नामेंट की छवि धूमिल हो सकती है। फिलहाल, पार्टी को टोरंटो से वापस भेज दिया गया है और उनकी टीम कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है। यह देखना दिलचस्प होगा कि घाना फुटबॉल एसोसिएशन और फीफा इस मुद्दे को कनाडाई सरकार के साथ कैसे उठाते हैं, क्योंकि आने वाले समय में कई और खिलाड़ियों को ऐसी ही चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
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