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भारतीय आईटी सेक्टर में बदल रहा है नौकरी का ट्रेंड: जानें कौन से स्किल्स दिलाएंगे अब लाखों का पैकेज
ICN24 Newsroom 13 अग॰ 2026, 11:37 pm
भारतीय आईटी क्षेत्र में अब व्यापक भर्ती का दौर खत्म हो रहा है। कंपनियां अब एंट्री-लेवल के बजाय अनुभवी और विशिष्ट कौशल वाले पेशेवरों को भारी वेतन पर नियुक्त करने को प्राथमिकता दे रही हैं।
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र, जो कभी सामूहिक नियुक्तियों और भारी इंक्रीमेंट के लिए जाना जाता था, अब एक बड़े संरचनात्मक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आईटी सेक्टर में अब बिना सोचे-समझे की जाने वाली भर्ती और हर स्तर पर मिलने वाली मोटी सैलरी का दौर लगभग समाप्त हो चुका है। अब कंपनियां 'क्वांटिटी' के बजाय 'क्वालिटी' पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं, जिससे नौकरी के बाजार में समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।
हालिया रिपोर्टों और उद्योग विश्लेषकों के अनुसार, भारत की प्रमुख आईटी कंपनियों ने एंट्री-लेवल या कैंपस प्लेसमेंट में काफी कटौती की है। इसके उलट, वे अब उन अनुभवी पेशेवरों (Lateral Hires) को जोड़ने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही हैं, जिनके पास विशिष्ट तकनीकी ज्ञान है। इस बदलाव का सीधा असर उन युवाओं पर पड़ रहा है जो केवल बेसिक कोडिंग स्किल्स के दम पर इस क्षेत्र में प्रवेश करना चाहते थे। अब बाजार में टिके रहने के लिए केवल डिग्री ही नहीं, बल्कि उद्योग की मांग के अनुसार खुद को अपग्रेड करना अनिवार्य हो गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जेनरेटिव एआई (GenAI), क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा और डेटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञों की मांग चरम पर है। इन क्षेत्रों में कौशल रखने वाले पेशेवरों को कंपनियां 'प्रीमियम वेतन' देने के लिए तैयार हैं। यह ट्रेंड न केवल भारत में बल्कि ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में रह रहे भारतीय मूल के पेशेवरों के लिए भी महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया में भी भारतीय आईटी दिग्गज जैसे टीसीएस (TCS), इंफोसिस और विप्रो की बड़ी मौजूदगी है। भारत में आ रहे इन बदलावों का सीधा असर ग्लोबल टैलेंट पाइपलाइन पर पड़ता है, जिससे ऑस्ट्रेलिया के टेक इकोसिस्टम में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों के लिए नई चुनौतियां और अवसर दोनों पैदा हो रहे हैं।
आर्थिक अनिश्चितता और ऑटोमेशन के बढ़ते प्रभाव के कारण, कंपनियां अब अपनी 'बेंच स्ट्रेंथ' को कम कर रही हैं। पहले कंपनियां भविष्य की परियोजनाओं के लिए पहले से ही बड़ी संख्या में लोगों को भर्ती कर लेती थीं, लेकिन अब वे 'जस्ट-इन-टाइम' हायरिंग मॉडल अपना रही हैं। इसका मतलब है कि जब प्रोजेक्ट हाथ में हो, तभी विशिष्ट योग्यता वाले व्यक्ति को नियुक्त किया जाए।
ऑस्ट्रेलियाई परिप्रेक्ष्य में देखें तो, यहां के टेक सेक्टर में भी स्किल शॉर्टेज की समस्या है। भारतीय पेशेवर जो अपनी स्किल्स को आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रों में अपडेट कर रहे हैं, उनके लिए ऑस्ट्रेलिया और भारत दोनों बाजारों में बेहतर संभावनाएं बनी हुई हैं। निष्कर्ष यह है कि अब आईटी सेक्टर में करियर बनाने के लिए निरंतर सीखने की प्रवृत्ति ही सफलता की कुंजी है। पुराने ढर्रे पर चल रही कोडिंग अब आपको प्रीमियम वेतन नहीं दिला सकती; उसके लिए आपको भविष्य की तकनीकों में महारत हासिल करनी होगी।
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