राजनीति
मध्य पूर्व में गहराता संकट: 'नो रिटर्न' नीति के बाद गाजा और लेबनान में तनाव, क्या ईरान के साथ सीधा युद्ध होगा?
ICN24 Newsroom 3 जुल॰ 2026, 03:31 am

इजरायल की नई सैन्य रणनीति और गाजा-लेबनान सीमा पर 'नो रिटर्न' नीति ने मध्य पूर्व में युद्ध के नए मोर्चे खोल दिए हैं, जिससे ईरान के साथ टकराव का खतरा बढ़ गया है।
यरुशलम और बेरुत के बीच बढ़ते तनाव ने मध्य पूर्व को एक बार फिर बड़े क्षेत्रीय युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने गाजा, दक्षिणी लेबनान और सीरिया के कुछ हिस्सों में अपनी सैन्य मौजूदगी को लेकर 'नो रिटर्न' (वापसी नहीं) की नीति अपना ली है। इसका सीधा अर्थ है कि इजरायल अब उन इलाकों से पीछे हटने को तैयार नहीं है जिन्हें उसने सुरक्षा बफर जोन के रूप में चिह्नित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति न केवल शांति वार्ताओं को बाधित कर रही है, बल्कि ईरान को सीधे संघर्ष में उतरने के लिए उकसा सकती है।
गाजा में इजरायल ने फिलाडेल्फी कॉरिडोर और नेटजारिम कॉरिडोर पर अपना नियंत्रण कड़ा कर दिया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार का तर्क है कि हमास को दोबारा संगठित होने से रोकने के लिए इन क्षेत्रों पर स्थायी कब्जा अनिवार्य है। वहीं, लेबनान की सीमा पर हिजबुल्लाह के साथ जारी गोलाबारी अब भीषण युद्ध का रूप ले चुकी है। इजरायल ने साफ कर दिया है कि जब तक उत्तरी इजरायल के विस्थापित नागरिक अपने घरों को नहीं लौट जाते, तब तक लेबनान में जमीनी और हवाई हमले जारी रहेंगे।
इस संघर्ष का सबसे चिंताजनक पहलू सीरिया और ईरान की संलिप्तता है। इजरायली वायुसेना ने हाल के हफ्तों में सीरिया में ईरान समर्थित ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं। ईरान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता पर हमला बताया है और जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है। यदि ईरान सीधे तौर पर युद्ध में शामिल होता है, तो इसके परिणाम पूरे विश्व के लिए विनाशकारी हो सकते हैं।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए यह संकट चिंता का विषय बना हुआ है। ऑस्ट्रेलिया में एक बड़ी आबादी ऐसी है जिसके व्यापारिक हित या परिवार मध्य पूर्व और खाड़ी देशों में रहते हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई नागरिक इस युद्ध के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर आशंकित हैं। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने भी अपने नागरिकों को लेबनान और प्रभावित क्षेत्रों से तुरंत निकलने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले कुछ सप्ताह अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। यदि अमेरिका और अरब देश तनाव को कम करने में विफल रहते हैं, तो इजरायल-ईरान के बीच सीधा टकराव अपरिहार्य हो सकता है। फिलहाल, 'नो रिटर्न' की नीति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इजरायल अपनी सुरक्षा सीमाओं को स्थायी रूप से फिर से परिभाषित करने की राह पर है।
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