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इंग्लैंड के जेड स्पेंस ने थॉमस पार्टी से हाथ मिलाने से किया इनकार; वीजा विवाद और हूटिंग के बीच बढ़ा तनाव
ICN24 Newsroom 24 जून 2026, 02:12 pm
इंग्लैंड और घाना के बीच मैच से पहले जेड स्पेंस ने थॉमस पार्टी से हाथ नहीं मिलाया। पार्टी को वीजा समस्याओं और दर्शकों की हूटिंग का भी सामना करना पड़ा।
फीफा विश्व कप 2026 के एक रोमांचक मुकाबले से पहले खेल भावना को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। इंग्लैंड और घाना के बीच मैच की शुरुआत में इंग्लैंड के डिफेंडर जेड स्पेंस ने घाना के अनुभवी मिडफील्डर थॉमस पार्टी के साथ हाथ मिलाने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया। यह घटना तब हुई जब टीमें पारंपरिक प्री-मैच हैंडशेक के लिए लाइन में खड़ी थीं। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिससे फुटबॉल जगत में बहस छिड़ गई है।
थॉमस पार्टी, जो पहले आर्सेनल के लिए खेल चुके हैं और अब घाना का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, के लिए यह मुकाबला पहले से ही चुनौतीपूर्ण था। स्टेडियम में मौजूद दर्शकों ने पार्टी के खिलाफ जमकर हूटिंग की। इस तनावपूर्ण माहौल के बीच स्पेंस के व्यवहार ने आग में घी डालने का काम किया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तनाव के पीछे उत्तर लंदन डर्बी की प्रतिद्वंद्विता हो सकती है, क्योंकि जेड स्पेंस टोटेनहम हॉटस्पर (Spurs) से जुड़े हैं, जबकि पार्टी लंबे समय तक आर्सेनल का हिस्सा रहे हैं।
इस खेल विवाद के पीछे एक गहरा प्रशासनिक पहलू भी है, जो विशेष रूप से प्रवासी और अंतरराष्ट्रीय समुदायों के लिए प्रासंगिक है। थॉमस पार्टी को इस मैच के लिए समय पर इंग्लैंड पहुंचने में गंभीर वीजा समस्याओं का सामना करना पड़ा था। रिपोर्ट्स के अनुसार, पार्टी ने अपनी वीजा बाधाओं को 'नियंत्रण से बाहर' बताया था। ईएसपीएन इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, वीजा नियमों की जटिलता और प्रशासनिक देरी के कारण पार्टी की तैयारी प्रभावित हुई थी। यह मुद्दा ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो अक्सर अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान समान वीजा प्रक्रियाओं और बाधाओं का सामना करते हैं।
मैच के दौरान पार्टी की हर गतिविधि पर दर्शकों की पैनी नजर थी। घाना के कोच ने मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस स्थिति पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि उनके खिलाड़ियों के साथ मैदान पर गरिमापूर्ण व्यवहार होना चाहिए। दूसरी ओर, इंग्लैंड खेमे ने स्पेंस की इस हरकत पर अब तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। खेल विश्लेषकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस तरह का व्यवहार खेल की गरिमा को कम करता है, खासकर जब खिलाड़ी पहले से ही व्यक्तिगत या प्रशासनिक दबाव में हों।
यह घटना खेल और राजनीति के बीच की धुंधली रेखा को भी दर्शाती है। जहां एक ओर खिलाड़ी अपनी राष्ट्रीय गरिमा के लिए लड़ते हैं, वहीं दूसरी ओर वीजा जैसी नौकरशाही की समस्याएं उनके करियर में बाधा डालती हैं। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई प्रवासियों के लिए, जो खेल के बड़े प्रशंसक हैं, यह खबर न केवल फुटबॉल के बारे में है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एथलीटों को मिलने वाली सुरक्षा और सम्मान के बारे में भी है। जैसे-जैसे विश्व कप आगे बढ़ रहा है, फीफा और संबंधित फुटबॉल संघों पर यह दबाव बढ़ रहा है कि वे खिलाड़ियों के बीच आपसी सम्मान और वीजा प्रक्रियाओं के सरलीकरण पर ध्यान दें।
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