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मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने पर तेलंगाना कांग्रेस का 'सत्याग्रह', लोकतंत्र बचाने की पुकार
ICN24 Newsroom 21 जून 2026, 03:40 am

तेलंगाना कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन खारिज होने के विरोध में 'सत्याग्रह' शुरू किया है, जिसमें भाजपा पर लोकतांत्रिक मूल्यों के हनन का आरोप लगाया गया है।
हैदराबाद: तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (TPCC) ने पूर्व सांसद और पार्टी की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन को खारिज किए जाने के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी कार्यकर्ताओं और शीर्ष नेताओं ने इस निर्णय को 'अलोकतांत्रिक' करार देते हुए राज्य भर में 'सत्याग्रह' विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) चुनाव आयोग और प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग कर विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।
गांधीवादी तरीके से किए जा रहे इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन केवल तकनीकी आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक द्वेष के कारण रद्द किया गया है। नटराजन, जिन्हें राहुल गांधी की करीबी माना जाता है, पार्टी के भीतर एक स्वच्छ और ईमानदार छवि वाली नेता के रूप में जानी जाती हैं। उनके नामांकन के खारिज होने से न केवल तेलंगाना कांग्रेस में रोष है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी पार्टी ने इसे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करने वाला कदम बताया है।
सत्याग्रह स्थल पर बोलते हुए प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि भाजपा जानबूझकर ऐसे उम्मीदवारों को निशाना बना रही है जो संसद में जनहित के मुद्दे उठाने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने कहा कि नामांकन में जिस 'तकनीकी त्रुटि' का हवाला दिया गया है, वह बेहद मामूली थी और उसे सुधारने का अवसर दिया जाना चाहिए था। कांग्रेस का मानना है कि यह सीधे तौर पर विपक्ष के संवैधानिक अधिकारों पर हमला है।
यह राजनीतिक घटनाक्रम केवल भारत तक सीमित नहीं है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय मूल के समुदायों के बीच भी भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर अक्सर चर्चाएं होती रहती हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसे प्रवासी भारतीय, जो भारत की राजनीति पर पैनी नजर रखते हैं, इस तरह के विवादों को लोकतंत्र की परिपक्वता की कसौटी के रूप में देखते हैं। ICN24 से बात करते हुए कुछ सामुदायिक नेताओं ने चिंता जताई कि यदि नामांकन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी रही, तो इससे वैश्विक स्तर पर भारत की लोकतांत्रिक छवि प्रभावित हो सकती है।
फिलहाल, कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका यह सत्याग्रह तब तक जारी रहेगा जब तक कि इस मुद्दे पर उचित स्पष्टीकरण और न्याय नहीं मिल जाता। पार्टी आने वाले दिनों में इस विरोध को और तेज करने की योजना बना रही है, जिससे राज्य की राजनीति में नया उबाल आने की संभावना है। भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे केवल कांग्रेस की 'हताशा' बताया है।
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