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₹20 लाख से कम के कर्ज पर NBFC नहीं कर सकतीं 'सरफेसी' कार्रवाई, चंडीगढ़ DRT का महत्वपूर्ण फैसला
ICN24 Newsroom 6 जुल॰ 2026, 08:31 am

चंडीगढ़ DRT ने राशि शर्मा बनाम आधार हाउसिंग फाइनेंस मामले में फैसला सुनाया कि ₹20 लाख से कम के ऋण के लिए NBFC सरफेसी कानून का उपयोग नहीं कर सकती हैं।
चंडीगढ़ स्थित ऋण वसूली न्यायाधिकरण (DRT) ने एक ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया है कि कोई भी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) या हाउसिंग फाइनेंस कंपनी (HFC) उन मामलों में सरफेसी (SARFAESI) अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू नहीं कर सकती है, जहां दावा की गई सुरक्षित ऋण राशि 20 लाख रुपये से कम है। न्यायाधिकरण ने 'राशि शर्मा बनाम आधार हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड' के मामले में सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
मामले के तथ्यों के अनुसार, आधार हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड ने ऋण की वसूली के लिए सरफेसी अधिनियम की धारा 13(2) के तहत नोटिस जारी किया था। हालांकि, याचिकाकर्ता राशि शर्मा ने इस कार्रवाई को यह कहते हुए चुनौती दी कि मांगी गई ऋण राशि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा निर्धारित न्यूनतम सीमा से कम है। DRT ने पाया कि चूंकि मांग नोटिस में ऋण राशि 20 लाख रुपये के वैधानिक सीमा से कम थी, इसलिए वित्तीय संस्थान के पास सरफेसी कानून लागू करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था।
यह निर्णय भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 2021 में जारी की गई एक अधिसूचना पर आधारित है। इस अधिसूचना के तहत, NBFC के लिए सरफेसी अधिनियम लागू करने की न्यूनतम सीमा को 50 लाख रुपये से घटाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया था। हालांकि, यह सीमा अभी भी बैंकों के लिए लागू 1 लाख रुपये की सीमा से काफी अधिक है। चंडीगढ़ DRT ने जोर देकर कहा कि इस अधिसूचना का उल्लंघन करके शुरू की गई कोई भी कार्यवाही 'बिना अधिकार क्षेत्र' (Without Jurisdiction) मानी जाएगी।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय प्रवासियों (NRIs) के लिए यह फैसला अत्यंत महत्वपूर्ण है। बड़ी संख्या में भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई नागरिक भारत में संपत्ति खरीदने के लिए अक्सर निजी हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों से ऋण लेते हैं। कई बार किश्तों के भुगतान में देरी होने पर ये कंपनियां संपत्ति जब्त करने की धमकी देती हैं। यह फैसला स्पष्ट करता है कि यदि बकाया राशि 20 लाख रुपये से कम है, तो इन कंपनियों को सामान्य दीवानी अदालतों या अन्य कानूनी रास्तों का उपयोग करना होगा, वे सीधे सरफेसी अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई नहीं कर सकतीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से छोटे कर्जदारों को बड़ी राहत मिलेगी। सरफेसी अधिनियम बैंकों और वित्तीय संस्थानों को अदालत के हस्तक्षेप के बिना चूककर्ताओं की सुरक्षा (Secured Assets) को कब्जे में लेने और बेचने का व्यापक अधिकार देता है। 20 लाख रुपये की सुरक्षात्मक सीमा यह सुनिश्चित करती है कि छोटे ऋण लेने वाले ग्राहकों को उनकी संपत्ति से बेदखल करने से पहले पर्याप्त कानूनी सुरक्षा मिले।
न्यायाधिकरण ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि वित्तीय संस्थानों को ऋण वसूली की प्रक्रिया शुरू करने से पहले नियामक दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करना चाहिए। यदि प्रक्रिया की शुरुआत में ही अधिकार क्षेत्र की कमी है, तो उसके बाद की गई पूरी कार्रवाई को कानून की नजर में अमान्य माना जाएगा। इस निर्णय ने एक बार फिर उधारकर्ताओं के अधिकारों और वित्तीय संस्थानों की मनमानी शक्तियों के बीच संतुलन स्थापित किया है।
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