राजनीति
यूपी की सियासत में उबाल: 'कंस के वंशज और राक्षस', ओपी राजभर की सपा सांसदों पर विवादित टिप्पणी
ICN24 Newsroom 7 अग॰ 2026, 05:38 pm

उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर ने समाजवादी पार्टी और यादव समुदाय पर तीखा हमला करते हुए उन्हें 'कंस का वंशज' और सपा सांसदों को 'राक्षस' बताया है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानों के तीर एक बार फिर मर्यादा की सीमाएं लांघते नजर आ रहे हैं। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी (सपा) और उसके कोर वोट बैंक यादव समुदाय पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। राजभर ने सपा के नवनिर्वाचित 37 सांसदों की तुलना 'राक्षसों' से की है और यादव समुदाय को भगवान कृष्ण के बजाय 'कंस का वंशज' बताया है।
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की आहट अभी से सुनाई देने लगी है, और राजभर का यह बयान उसी चुनावी बिसात का हिस्सा माना जा रहा है। एक जनसभा को संबोधित करते हुए राजभर ने कहा, 'अहीर (यादव) जाति के लोग खुद को कृष्ण का वंशज बताते हैं, लेकिन उनके कारनामे कंस जैसे हैं। ये लोग कृष्ण के नहीं, बल्कि कंस के डीएनए वाले हैं।' उन्होंने आगे कहा कि हाल के दिनों में राज्य में हुए अपराधों में एक खास वर्ग के लोगों की संलिप्तता यह दर्शाती है कि इनकी मानसिकता विनाशकारी है।
राजभर यहीं नहीं रुके, उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024 में समाजवादी पार्टी की बड़ी जीत पर तंज कसते हुए कहा कि जो 37 सांसद चुनकर संसद पहुंचे हैं, वे असल में 'राक्षस' प्रवृत्ति के हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा के शासनकाल में गुंडागर्दी और अराजकता चरम पर थी और अब ये जीते हुए प्रतिनिधि उसी दौर को वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं। राजभर ने अखिलेश यादव को चुनौती देते हुए कहा कि जनता अब उनके बहकावे में नहीं आने वाली है और आगामी चुनावों में उन्हें कड़ा सबक सिखाया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजभर का यह बयान पिछड़ों और अति-पिछड़ों के बीच ध्रुवीकरण की एक कोशिश है। उत्तर प्रदेश में यादव और गैर-यादव पिछड़ों की राजनीति हमेशा से केंद्र में रही है। राजभर, जो खुद को अति-पिछड़ों का नेता बताते हैं, अक्सर यादव समुदाय के राजनीतिक वर्चस्व को चुनौती देते रहे हैं। हालांकि, इस तरह की भाषा के इस्तेमाल पर विपक्षी दलों ने कड़ी आपत्ति जताई है। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ताओं ने इसे राजभर की हताशा बताया है और कहा है कि वे अपनी राजनीतिक जमीन खिसकते देख इस तरह के निम्न स्तर के बयान दे रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेषकर उत्तर प्रदेश और बिहार मूल के प्रवासियों के लिए भारत की जातिगत राजनीति हमेशा चर्चा का विषय रहती है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में सक्रिय 'यूपी डायस्पोरा' के सदस्यों का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी से राज्य की छवि प्रभावित होती है। हालांकि, वहां के स्थानीय व्हाट्सएप ग्रुप्स और सामुदायिक मंचों पर इस खबर ने एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या विकास के दावों के बीच यूपी की राजनीति फिर से पुराने 'जातिगत युद्ध' की ओर लौट रही है।
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