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दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा; धोखाधड़ी मामले में मिली थी सजा

ICN24 Newsroom 10 जुल॰ 2026, 05:31 am
दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा; धोखाधड़ी मामले में मिली थी सजा

दिल्ली उच्च न्यायालय ने दतिया के पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सजा के खिलाफ दायर याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। मामला बैंक रिकॉर्ड में हेराफेरी से जुड़ा है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने मध्य प्रदेश के दतिया से पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती द्वारा दायर एक महत्वपूर्ण याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह याचिका एक निचली अदालत द्वारा उन्हें धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में सुनाई गई तीन साल की जेल की सजा को चुनौती देने के लिए दायर की गई थी। मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद, अदालत ने संकेत दिया है कि इस पर अंतिम निर्णय शुक्रवार को सुनाया जा सकता है। राजेंद्र भारती, जो मध्य प्रदेश की राजनीति में एक प्रमुख चेहरा रहे हैं, उन पर बैंक रिकॉर्ड के साथ कथित रूप से हेरफेर करने और अवैध वित्तीय लाभ प्राप्त करने के लिए दस्तावेजों में जालसाजी करने का आरोप है। निचली अदालत ने उन्हें इन आरोपों में दोषी पाते हुए तीन साल के कारावास की सजा सुनाई थी। भारतीय कानून के अनुसार, दो साल या उससे अधिक की सजा मिलने पर किसी भी जन प्रतिनिधि को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (RP Act) के तहत अयोग्य घोषित कर दिया जाता है। इसी कानून के चलते भारती की सदस्यता पर भी संकट गहराया और उन्हें अयोग्यता का सामना करना पड़ा। दिल्ली हाईकोर्ट में हुई हालिया सुनवाई के दौरान, भारती के कानूनी पक्ष ने दलील दी कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं और प्रक्रियात्मक खामियां हैं। दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष ने साक्ष्यों का हवाला देते हुए सजा को बरकरार रखने की मांग की। सुनवाई के बाद भारती ने मीडिया से बात करते हुए पुष्टि की कि बहस पूरी हो चुकी है और अब सभी की निगाहें शुक्रवार को आने वाले फैसले पर टिकी हैं। मध्य प्रदेश की राजनीति में इस मामले के गहरे निहितार्थ हैं। दतिया क्षेत्र में भारती का राजनीतिक प्रभाव रहा है और इस कानूनी लड़ाई का परिणाम उनके भविष्य के साथ-साथ आगामी चुनावों में क्षेत्रीय समीकरणों को भी प्रभावित करेगा। यदि अदालत उनकी सजा पर रोक लगाती है या इसे निरस्त करती है, तो उनके लिए राजनीतिक वापसी का रास्ता साफ हो सकता है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए, भारत में शासन और विधायी शुचिता (legislative integrity) का मुद्दा हमेशा से चर्चा का विषय रहा है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई प्रवासी, जो अक्सर अपने गृह राज्यों के विकास और वहां की राजनीतिक स्थिरता पर नजर रखते हैं, इस तरह के मामलों को पारदर्शिता और जवाबदेही के पैमाने के रूप में देखते हैं। पूर्व विधायकों और जनप्रतिनिधियों से जुड़े भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के मामले अक्सर प्रवासियों के बीच निवेश और प्रशासनिक भरोसे को लेकर बहस छेड़ देते हैं। ICN24 इस मामले के घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। शुक्रवार को आने वाला फैसला न केवल राजेंद्र भारती का भाग्य तय करेगा, बल्कि यह भी स्पष्ट करेगा कि क्या वे फिर से सक्रिय राजनीति में अपनी जगह बना पाएंगे या उन्हें जेल की सजा काटनी होगी।
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