राजनीति
कल्याणकारी योजनाओं में पारदर्शिता के लिए दिल्ली में लागू हो सकता है हरियाणा का 'परिवार पहचान पत्र' मॉडल
ICN24 Newsroom 10 अग॰ 2026, 02:37 pm
दिल्ली सरकार हरियाणा के 'परिवार पहचान पत्र' की तर्ज पर एक नया सिस्टम लागू करने पर विचार कर रही है, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ सही पात्रों तक पहुंच सके।
दिल्ली सरकार अपनी सामाजिक कल्याण योजनाओं के वितरण तंत्र में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सरकार पड़ोसी राज्य हरियाणा के 'परिवार पहचान पत्र' (PPP) मॉडल का अध्ययन कर रही है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य शहर में दी जाने वाली विभिन्न सरकारी सुविधाओं को सुव्यवस्थित करना और डेटा के दोहराव (duplication) को समाप्त करना है। वर्तमान में, दिल्ली के निवासी विभिन्न विभागों और एजेंसियों द्वारा संचालित कई योजनाओं का लाभ उठाते हैं, लेकिन एक एकीकृत प्रणाली न होने के कारण अक्सर प्रशासन को लाभार्थियों की सटीक पहचान करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
प्रस्तावित 'फैमिली कार्ड' या परिवार-आधारित पहचान प्रणाली का उद्देश्य एक ऐसा साझा डेटाबेस तैयार करना है, जिसमें एक परिवार के सभी सदस्यों का विवरण दर्ज हो। इससे सरकार को यह समझने में मदद मिलेगी कि कौन सा परिवार किन-किन योजनाओं का लाभ उठा रहा है और क्या वे वास्तव में उन लाभों के पात्र हैं। हरियाणा में, इस कार्ड के माध्यम से राशन, वृद्धावस्था पेंशन और छात्रवृत्ति जैसी सेवाओं को आधार कार्ड से जोड़कर सीधे लाभार्थियों तक पहुँचाया जा रहा है, जिससे बिचौलियों की भूमिका लगभग समाप्त हो गई है।
दिल्ली के प्रशासनिक गलियारों में इस बात पर चर्चा तेज है कि क्या इस तंत्र को दिल्ली की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप ढाला जा सकता है। दिल्ली एक महानगरीय क्षेत्र है जहाँ प्रवासियों की संख्या अधिक है और यहाँ की शासन व्यवस्था में केंद्र और राज्य के बीच शक्तियों का विभाजन भी एक महत्वपूर्ण कारक है। ऐसे में, एक व्यापक डेटाबेस तैयार करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसे सही तरीके से लागू किया गया, तो यह सरकारी खजाने पर पड़ने वाले अनावश्यक बोझ को कम करेगा और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाएगा।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेषकर वे जिनका परिवार दिल्ली या एनसीआर क्षेत्र में रहता है, के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है। अक्सर एनआरआई (NRI) अपने पीछे रह गए बुजुर्ग माता-पिता या आश्रितों के लिए सरकारी योजनाओं के पंजीकरण और सत्यापन की प्रक्रियाओं को लेकर चिंतित रहते हैं। डिजिटल पहचान प्रणाली और एकीकृत फैमिली कार्ड के आने से विदेशों में बैठे भारतीयों के लिए अपने परिजनों के प्रशासनिक कार्यों और सरकारी लाभों की निगरानी करना आसान हो जाएगा। यह कदम भारत में 'डिजिटल गवर्नेंस' की ओर एक और बड़ा कदम माना जा रहा है।
हालांकि, इस योजना को लेकर कुछ निजता संबंधी चिंताएं भी जताई जा रही हैं। डेटा सुरक्षा और नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी के संरक्षण को लेकर विशेषज्ञों ने सरकार को सतर्क रहने की सलाह दी है। दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अभी यह प्रस्ताव शुरुआती चरण में है और विभिन्न विभागों से फीडबैक मांगा गया है। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो दिल्ली के लाखों परिवारों को अब हर योजना के लिए अलग-अलग दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि एक ही कार्ड उनके लिए सभी सरकारी दरवाजों की चाबी बन जाएगा।
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