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सरहदों के पार नृत्य: BYU बॉलरूम डांस कंपनी ने भारत में दी ऐतिहासिक प्रस्तुतियाँ
ICN24 Newsroom 10 जून 2026, 09:00 pm

ब्रिघम यंग यूनिवर्सिटी (BYU) की प्रसिद्ध बॉलरूम डांस कंपनी ने दिल्ली और बेंगलुरु में अपने शानदार प्रदर्शन के साथ भारत में ऐतिहासिक शुरुआत की।
भारत की सांस्कृतिक राजधानी नई दिल्ली और तकनीकी केंद्र बेंगलुरु हाल ही में एक अद्वितीय कलात्मक अनुभव के गवाह बने। अमेरिका की प्रसिद्ध ब्रिघम यंग यूनिवर्सिटी (BYU) की बॉलरूम डांस कंपनी ने अपनी पहली भारत यात्रा के दौरान दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। 4 से 9 जून 2026 के बीच आयोजित इन कार्यक्रमों ने न केवल नृत्य की कला का प्रदर्शन किया, बल्कि दो देशों के बीच सांस्कृतिक सेतु का काम भी किया।
इस ऐतिहासिक दौरे की शुरुआत नई दिल्ली में हुई, जहाँ 4 और 6 जून को आयोजित कार्यक्रमों में 1,000 से अधिक दर्शक शामिल हुए। इसके बाद, दल ने दक्षिण भारत का रुख किया और 9 जून को बेंगलुरु में एक भव्य समापन कार्यक्रम (ग्रैंड फिनाले) के साथ अपनी यात्रा पूरी की। कंपनी के नर्तकों ने वाल्ट्ज, टैंगो और सांबा जैसे शास्त्रीय बॉलरूम रूपों के साथ-साथ आधुनिक नृत्य शैलियों का भी प्रदर्शन किया, जिसने भारतीय दर्शकों को अपनी सीटों से उठने पर मजबूर कर दिया।
नृत्य के इस आदान-प्रदान का महत्व केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं था। BYU की टीम ने स्थानीय कलाकारों और छात्रों के साथ कार्यशालाओं में भी भाग लिया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आयोजन वैश्विक स्तर पर कलात्मक सहयोग को बढ़ावा देते हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर विशेष महत्व रखती है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में बॉलरूम और लैटिन डांस के प्रति भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई युवाओं का आकर्षण तेजी से बढ़ रहा है, और इस तरह के अंतरराष्ट्रीय दौरे उभरते कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनते हैं।
नृत्य कंपनी के निदेशक ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि भारत की ऊर्जा और यहाँ के लोगों का प्यार अतुलनीय है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह दौरा भविष्य में और अधिक सांस्कृतिक विनिमय कार्यक्रमों का मार्ग प्रशस्त करेगा। खचाखच भरे ऑडिटोरियम और अंत में मिलने वाले 'स्टैंडिंग ओवेशन' ने यह साबित कर दिया कि कला की कोई सीमा नहीं होती।
ICN24 के लिए यह दौरा केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बढ़ती सांस्कृतिक स्वीकार्यता का प्रतीक है। जैसे-जैसे भारतीय प्रवासी दुनिया भर में फैल रहे हैं, इस तरह के पश्चिमी कला रूपों का भारत में आना और भारतीय संवेदनाओं के साथ उनका मेल होना एक नई वैश्विक संस्कृति को जन्म दे रहा है।
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