ऑस्ट्रेलिया
साइबर सुरक्षा अलर्ट: हीलिक्स और कुख्यात 'शाइनीहंटर्स' के बीच साठगांठ का खुलासा, ऑस्ट्रेलियाई कारोबारियों पर बढ़ा खतरा
ICN24 Newsroom 9 जुल॰ 2026, 11:31 pm

शोधकर्ताओं ने डेटा चोरी करने वाले समूह 'हीलिक्स' और कुख्यात हैकिंग ग्रुप 'शाइनीहंटर्स' के बीच साझा बुनियादी ढांचे का पता लगाया है, जिससे भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई उद्यमियों की चिंता बढ़ गई है।
ऑस्ट्रेलिया में साइबर अपराधों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है और हालिया खुलासे ने सुरक्षा विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है। साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं ने पाया है कि 'हीलिक्स' (Helix) नामक डेटा एक्सटॉर्शन समूह और कुख्यात हैकिंग सिंडिकेट 'शाइनीहंटर्स' (ShinyHunters) और 'ब्लैकफाइल' (BlackFile) के बीच गहरा संबंध है। इन समूहों द्वारा साझा किए जा रहे डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर से यह संकेत मिलता है कि ये अपराधी अब और अधिक संगठित होकर बड़े पैमाने पर पहचान की चोरी (identity theft) और फिरौती वसूलने की साजिश रच रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, हीलिक्स समूह मुख्य रूप से कंपनियों के संवेदनशील डेटा को चुराने और फिर उसे सार्वजनिक करने की धमकी देकर पैसे वसूलने का काम करता है। शाइनीहंटर्स के साथ इसके तार जुड़ना इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि शाइनीहंटर्स पहले ही टिकटमास्टर और सैंटेंडर जैसे वैश्विक दिग्गजों के डेटा ब्रीच में शामिल रहा है। साझा बुनियादी ढांचे का उपयोग करने का अर्थ है कि ये समूह न केवल तकनीक साझा कर रहे हैं, बल्कि संभवतः एक-दूसरे के चोरी किए गए डेटा और टूल्स तक भी पहुंच बना रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यहाँ का भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय न केवल सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और स्वास्थ्य सेवा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सक्रिय है, बल्कि बड़ी संख्या में मध्यम और लघु उद्योग (SME) भी चला रहा है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में स्थित भारतीय मूल के व्यवसाय अक्सर ग्राहकों की व्यक्तिगत जानकारी और वित्तीय डेटा संभालते हैं। पहचान की चोरी के बढ़ते मामलों का सीधा असर इन उद्यमियों की प्रतिष्ठा और आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है।
साइबर सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि यह नया गठबंधन 'हैकर्स-एज़-ए-सर्विस' मॉडल की ओर इशारा करता है, जहाँ अलग-अलग समूह मिलकर एक बड़े लक्ष्य पर हमला करते हैं। यह प्रवृत्ति हाल के महीनों में ऑस्ट्रेलिया में देखी गई बड़ी डेटा चोरी की घटनाओं से मेल खाती है। भारतीय समुदाय के जो लोग अंतरराष्ट्रीय व्यापार या डिजिटल लेनदेन से जुड़े हैं, उन्हें अब अपनी सुरक्षा प्रणालियों को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है।
सुरक्षा विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि व्यवसायों को मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) को अनिवार्य बनाना चाहिए और नियमित रूप से अपने सुरक्षा पैच अपडेट करने चाहिए। हीलिक्स और शाइनीहंटर्स जैसे समूह अक्सर उन कमजोरियों का फायदा उठाते हैं जिन्हें कंपनियां नजरअंदाज कर देती हैं। इसके अलावा, कर्मचारियों को फिशिंग हमलों के प्रति जागरूक करना भी अनिवार्य है। ICN24 की रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्ट्रेलियाई सरकार और सुरक्षा एजेंसियां भी इन नए उभरते खतरों पर नजर बनाए हुए हैं और भविष्य में सख्त साइबर सुरक्षा कानूनों को लागू करने की योजना बना रही हैं।
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