राजनीति
नीट और बेरोजगारी पर कांग्रेस का बड़ा दांव: 17 जून से राहुल गांधी का राष्ट्रव्यापी अभियान
ICN24 Newsroom 13 जून 2026, 04:31 pm

कांग्रेस ने पेपर लीक और बेरोजगारी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए 17 जून से राजस्थान के कोटा से राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करने का ऐलान किया है।
नई दिल्ली: देश की राजधानी में पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ गहन मंथन के बाद, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ एक बड़े अभियान का बिगुल फूंक दिया है। कांग्रेस ने घोषणा की है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में 17 जून से पेपर लीक, परीक्षा में अनियमितताओं और बढ़ती बेरोजगारी के मुद्दों को लेकर एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। इस अभियान की शुरुआत राजस्थान के कोचिंग हब कहे जाने वाले कोटा शहर से होगी।
हाल के दिनों में नीट (NEET) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली के आरोपों ने देश भर के छात्रों और अभिभावकों के बीच भारी असंतोष पैदा किया है। कांग्रेस ने इन मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर हमला तेज कर दिया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि युवाओं का भविष्य दांव पर है और सरकार इस प्रणालीगत विफलता को रोकने में असमर्थ रही है।
पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में सभी राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों और विधायी दलों के नेताओं को बुलाया गया था। बैठक का मुख्य एजेंडा लोकसभा चुनावों के बाद पार्टी की अगली रणनीति तय करना था। कांग्रेस अब केवल संसद के भीतर ही नहीं, बल्कि सड़कों पर भी सरकार को घेरने की तैयारी में है। कोटा को इस आंदोलन के प्रस्थान बिंदु के रूप में इसलिए चुना गया है क्योंकि यह लाखों छात्रों की उम्मीदों और उनके संघर्षों का केंद्र है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर विशेष महत्व रखती है। प्रवासी भारतीयों का एक बड़ा हिस्सा अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है और उनके परिवार के सदस्य अक्सर भारत में इन प्रतियोगी परीक्षाओं के जरिए अपने करियर की नींव रखते हैं। परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की कमी न केवल छात्रों के मनोबल को प्रभावित करती है, बल्कि यह विदेशों में रहने वाले अभिभावकों की चिंताएं भी बढ़ाती है।
कांग्रेस इस अभियान के जरिए बेरोजगारी के मुद्दे को फिर से मुख्यधारा की राजनीति में लाना चाहती है। पार्टी का आरोप है कि सरकारी पदों पर भर्ती में हो रही देरी और पेपर लीक की घटनाओं ने युवाओं के विश्वास को तोड़ा है। राहुल गांधी इस अभियान के दौरान विभिन्न शहरों में छात्रों, शिक्षाविदों और नागरिक समाज के सदस्यों के साथ संवाद करेंगे, ताकि इन समस्याओं के समाधान पर एक सामूहिक दबाव बनाया जा सके। आगामी दिनों में यह आंदोलन देश के अन्य हिस्सों में भी विस्तार लेगा।
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