राजनीति
वंदे मातरम् के अपमान का आरोप: नवगछिया में भाजपा और भाजयुमो का कैंडल मार्च, कांग्रेस से माफी की मांग
ICN24 Newsroom 17 अग॰ 2026, 05:37 am
नवगछिया में भाजपा और भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने 'वंदे मातरम्' के कथित अपमान के खिलाफ कैंडल मार्च निकाला और कांग्रेस नेतृत्व से माफी की मांग की।
बिहार के नवगछिया जिले में रविवार को राजनीतिक सरगर्मी तेज रही, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) की जिला इकाइयों ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के कथित अपमान के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने शहर के प्रमुख मार्गों पर कैंडल मार्च निकालकर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के प्रति अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया और देश से सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की।
यह विरोध मार्च भाजयुमो जिलाध्यक्ष कुणाल गुप्ता के नेतृत्व में आयोजित किया गया। मार्च की शुरुआत स्थानीय महाराज जी चौक से हुई, जो विभिन्न मार्गों से होता हुआ वैशाली चौक पर जाकर समाप्त हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता हाथों में मोमबत्तियां और तख्तियां लिए हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस पार्टी और उसके शीर्ष नेताओं के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। भाजपा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि हालिया घटनाक्रमों में कांग्रेस की ओर से राष्ट्रीय गीत का अनादर किया गया है, जो सीधे तौर पर राष्ट्र की अस्मिता पर प्रहार है।
वैशाली चौक पर आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए भाजपा जिलाध्यक्ष मुक्तिनाथ सिंह निषाद ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह हमारे देश की अस्मिता, स्वाभिमान और गौरवशाली स्वतंत्रता आंदोलन की भावनाओं का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जिस गीत ने स्वतंत्रता सेनानियों में ऊर्जा का संचार किया, उसका अपमान किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि स्वतंत्रता दिवस जैसे पवित्र अवसर के आसपास इस तरह का कथित अनादर देश की जनता की भावनाओं को आहत करता है।
भाजयुमो जिलाध्यक्ष कुणाल गुप्ता ने कहा कि युवा पीढ़ी राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति बहुत संवेदनशील है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कांग्रेस अपने रवैये में सुधार नहीं करती है और राष्ट्र से माफी नहीं मांगती है, तो यह आंदोलन और भी उग्र होगा। प्रदर्शन में पूर्व जिला महामंत्री मनोज कुमार पाण्डेय, जिला महामंत्री मुरारी लाल चिरानिया और जिला मंत्री ममता रजक सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया।
इस विरोध प्रदर्शन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों और गीतों से जुड़ी बहस अक्सर प्रवासी भारतीय समुदायों के बीच भी चर्चा का विषय बनती है। ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में रहने वाला भारतीय समुदाय अपनी जड़ों और राष्ट्रीय प्रतीकों से गहरा भावनात्मक जुड़ाव रखता है। भारत में होने वाले इस तरह के वैचारिक संघर्षों का प्रभाव वैश्विक स्तर पर भारतीय सॉफ्ट पावर और सामुदायिक एकता पर भी पड़ता है।
मार्च में मुख्य रूप से प्रदेश कार्यसमिति सदस्य प्रवीण भगत, नगर अध्यक्ष दीपक भगत, मंडल अध्यक्ष रंजीत झा, अनुसूचित जाति मोर्चा जिलाध्यक्ष शंभू पासवान, जिला महामंत्री नीतेश दास और अन्य कार्यकर्ता शामिल हुए। सुरक्षा के लिहाज से स्थानीय प्रशासन भी मुस्तैद नजर आया, ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे।
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