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भरत तिवारी के घर पहुंचे चिराग पासवान: संवेदनशीलता की इस तस्वीर ने जीता दिल, पटना की सियासत में नई चर्चा
ICN24 Newsroom 5 जुल॰ 2026, 11:31 am
पटना में भरत भूषण तिवारी के परिजनों से मुलाकात कर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने न केवल संवेदना व्यक्त की, बल्कि अपनी सक्रिय राजनीति से विरोधियों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया।
पटना: बिहार की राजनीति में इन दिनों बयानों का शोर तो बहुत है, लेकिन धरातल पर संवेदना की कमी अक्सर खलती है। हाल ही में भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर के बाद राजधानी पटना में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गईं। जहां अन्य नेता अपने कमरों में बैठकर बड़े-बड़े बयान दे रहे थे और सियासी समीकरण साधने में जुटे थे, वहीं केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने एक बार फिर अपनी अलग कार्यशैली से सबका ध्यान खींचा।
चिराग पासवान सीधे भरत तिवारी के घर पहुंचे और शोकाकुल परिजनों से मुलाकात की। इस मुलाकात की तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर लोगों का दिल जीत लिया है। राजनीति के जानकार इसे केवल एक मुलाकात नहीं, बल्कि चिराग की उस 'सेवा वाली सियासत' के रूप में देख रहे हैं, जिसका वादा वे अक्सर मंचों से करते आए हैं। जब पूरा प्रशासन और विपक्षी दल आरोपों-प्रत्यारोपों में उलझे थे, तब चिराग का जमीन पर उतरकर पीड़ित परिवार का हाथ थामना एक बड़ा संदेश दे गया।
भरत भूषण तिवारी के घर पर चिराग पासवान काफी भावुक नजर आए। उन्होंने परिवार को सांत्वना दी और न्याय का भरोसा दिलाया। बिहार की राजनीति में जाति और वर्ग के समीकरणों से ऊपर उठकर इस तरह की संवेदनशीलता कम ही देखने को मिलती है। आलोचकों का कहना है कि पटना में बैठकर राजनीति करने वाले अन्य दिग्गज नेता केवल ट्विटर और प्रेस कॉन्फ्रेंस तक ही सीमित रह गए, जबकि चिराग ने व्यक्तिगत रूप से पहुंचकर यह साबित किया कि सियासत का असली अर्थ जनता के दुख-दर्द में सहभागी होना है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेषकर बिहार से ताल्लुक रखने वाले प्रवासियों के बीच भी इस घटना की खासी चर्चा है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले बिहारी प्रवासियों का मानना है कि युवा नेतृत्व को इसी तरह संवेदनशील और सुलभ होना चाहिए। बिहार की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक स्थिरता को लेकर प्रवासी भारतीय हमेशा चिंतित रहते हैं और ऐसे में चिराग पासवान जैसे नेताओं की यह सक्रियता एक नई उम्मीद जगाती है।
कुल मिलाकर, भरत तिवारी के घर से आई इन तस्वीरों ने न केवल चिराग पासवान की छवि को एक जननेता के रूप में मजबूत किया है, बल्कि बिहार के अन्य राजनेताओं के सामने एक लकीर भी खींच दी है। यह घटना दर्शाती है कि लोकतंत्र में संवाद और संवेदना का स्थान सबसे ऊपर है, और जनता हमेशा उसी नेता को सिर-आंखों पर बिठाती है जो संकट के समय उनके बीच खड़ा होता है।
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