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चीन ने 'ओवरकैपेसिटी' के दावों को खारिज किया, व्यापार के राजनीतिकरण की कड़ी आलोचना की

ICN24 Newsroom 28 जुल॰ 2026, 11:35 pm
चीन ने 'ओवरकैपेसिटी' के दावों को खारिज किया, व्यापार के राजनीतिकरण की कड़ी आलोचना की

चीन ने औद्योगिक ओवरकैपेसिटी के आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया है, जिससे वैश्विक व्यापार संबंधों में तनाव और बढ़ गया है।

बीजिंग ने मंगलवार को उन वैश्विक आरोपों का कड़ा विरोध किया है जिनमें चीन पर उसकी औद्योगिक क्षमता (ओवरकैपेसिटी) को जरूरत से ज्यादा बढ़ाने का दोष मढ़ा जा रहा है। चीनी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पश्चिमी देशों द्वारा लगाए जा रहे ये आरोप केवल व्यापारिक विवादों में राजनीतिक अंक हासिल करने के लिए किए जा रहे हैं। चीन का तर्क है कि उसके इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs), लिथियम बैटरी और सौर ऊर्जा उत्पादों की सफलता उसकी बाजार प्रतिस्पर्धात्मकता और नवाचार का परिणाम है, न कि किसी अनुचित सरकारी सब्सिडी का। चीन के वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, औद्योगिक क्षमता का मुद्दा आर्थिक सिद्धांतों के बजाय भू-राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और यूरोपीय संघ चीनी हरित प्रौद्योगिकियों पर टैरिफ बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। बीजिंग का मानना है कि 'ओवरकैपेसिटी' का शोर मचाना असल में संरक्षणवाद (protectionism) को बढ़ावा देने का एक बहाना है, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर सकता है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया और चीन के बीच व्यापारिक संबंध लंबे समय से उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। हाल के महीनों में रिश्तों में सुधार के संकेतों के बावजूद, व्यापारिक नीतियों में किसी भी बड़े बदलाव का सीधा असर ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ऑस्ट्रेलिया अपनी हरित ऊर्जा क्रांति के लिए काफी हद तक चीनी सौर पैनलों और बैटरी तकनीकों पर निर्भर है। यदि व्यापारिक राजनीति के कारण इन आयातित वस्तुओं की कीमतें बढ़ती हैं, तो ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले परिवारों और छोटे व्यवसायों के लिए लागत बढ़ना तय है। दूसरी ओर, भारत के नजरिए से देखें तो यह स्थिति एक अवसर और चुनौती दोनों है। भारत अपनी 'मेक इन इंडिया' पहल के माध्यम से खुद को एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच आर्थिक सहयोग समझौता (ECTA) पहले से ही रणनीतिक साझेदारी को मजबूत कर रहा है। अगर चीनी उत्पादों पर वैश्विक प्रतिबंध बढ़ते हैं, तो भारतीय विनिर्माताओं के लिए ऑस्ट्रेलियाई बाजार में अपनी जगह बनाने का एक नया रास्ता खुल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि व्यापार का यह राजनीतिकरण न केवल आर्थिक विकास को धीमा करेगा, बल्कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को भी कमजोर कर सकता है। चीन ने चेतावनी दी है कि व्यापारिक बाधाएं खड़ी करने से उपभोक्ता हितों को नुकसान होगा और वैश्विक नवाचार की गति धीमी हो जाएगी। ICN24 की रिपोर्ट के अनुसार, आगामी महीनों में विश्व व्यापार संगठन (WTO) के भीतर इन मुद्दों पर और अधिक तीखी बहस होने की संभावना है, जिसका असर भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई व्यापारिक कॉरिडोर पर भी पड़ेगा।
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