राजनीति
फेविकोल पर 1 रुपये ज्यादा वसूलना पड़ा भारी: चेन्नई के उपभोक्ता को मिला 12,000 रुपये का हर्जाना
ICN24 Newsroom 5 जून 2026, 02:30 pm

चेन्नई के एक उपभोक्ता फोरम ने एमआरपी से अधिक दाम वसूलने पर स्टोर को फटकार लगाई और ग्राहक को मानसिक प्रताड़ना के लिए 12,000 रुपये देने का आदेश दिया।
भारत के उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा फैसला सुनाते हुए चेन्नई की एक उपभोक्ता अदालत ने एक रिटेल स्टोर को ग्राहक से एमआरपी से केवल 1 रुपये अधिक वसूलने के जुर्म में 12,000 रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया है। यह मामला चेन्नई के व्यासरपाड़ी की रहने वाली बसरिया द्वारा दायर किया गया था, जिन्होंने पेरम्बूर स्थित 'रेवती होम नीड्स' नामक विभागीय स्टोर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने उक्त स्टोर से फेविकोल एडहेसिव की एक ट्यूब खरीदी थी। जांच करने पर पाया गया कि दुकानदार ने निर्माता द्वारा प्रिंट की गई अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के ऊपर एक नया स्टिकर चिपका दिया था, जिस पर असली कीमत से 1 रुपये अधिक अंकित था। बसरिया ने इसे अनुचित व्यापार प्रथा और उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के दौरान उपभोक्ता आयोग ने पाया कि दुकानदार ने जानबूझकर मूल कीमत को छिपाने के लिए अतिरिक्त स्टिकर का उपयोग किया था। आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में विक्रेता एमआरपी से अधिक शुल्क नहीं ले सकता। अदालत ने कहा कि भले ही राशि मात्र 1 रुपये थी, लेकिन यह व्यापारिक नैतिकता का उल्लंघन है और ग्राहकों के साथ होने वाली धोखाधड़ी का उदाहरण है।
आयोग ने अपने फैसले में स्टोर को आदेश दिया कि वह शिकायतकर्ता को मानसिक पीड़ा और सेवा में कमी के लिए 10,000 रुपये का मुआवजा दे, साथ ही कानूनी खर्च के रूप में 2,000 रुपये का भुगतान करे। इसके अतिरिक्त, स्टोर को वह वसूला गया 1 रुपया भी वापस करने का निर्देश दिया गया है।
यह मामला न केवल भारत में बल्कि ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण सबक है। ऑस्ट्रेलिया में 'ऑस्ट्रेलियाई उपभोक्ता कानून' (ACL) के तहत उपभोक्ताओं को समान रूप से कड़े अधिकार प्राप्त हैं। वहां भी यदि कोई रिटेलर भ्रामक मूल्य निर्धारण या गलत विज्ञापन का सहारा लेता है, तो 'ऑस्ट्रेलियाई प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ता आयोग' (ACCC) भारी जुर्माना लगा सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फैसले उपभोक्ताओं को छोटे स्तर पर होने वाली लूट के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित करते हैं। अक्सर ग्राहक छोटी राशि समझकर चुप रह जाते हैं, लेकिन चेन्नई का यह मामला साबित करता है कि न्याय के लिए राशि का मूल्य नहीं, बल्कि सिद्धांतों की रक्षा महत्वपूर्ण है।
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