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चंडीगढ़ नगर निगम सदन में ₹227 करोड़ के 'टेबल एजेंडा' पर भारी हंगामा, विपक्ष ने काटा बवाल

ICN24 Newsroom 21 अग॰ 2026, 03:37 am
चंडीगढ़ नगर निगम सदन में ₹227 करोड़ के 'टेबल एजेंडा' पर भारी हंगामा, विपक्ष ने काटा बवाल

चंडीगढ़ नगर निगम की बैठक में 227 करोड़ रुपये के टेबल एजेंडे को लेकर विपक्ष ने जमकर हंगामा किया और पारदर्शिता पर सवाल उठाए।

चंडीगढ़ नगर निगम की सदन की बैठक में मंगलवार को उस समय भारी हंगामा और अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला, जब प्रशासन द्वारा 227 करोड़ रुपये का एक 'टेबल एजेंडा' पेश किया गया। विपक्ष के पार्षदों ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन बताया। हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही में कई बार व्यवधान पड़ा और स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि मार्शल को भी हस्तक्षेप करना पड़ा। विपक्ष का मुख्य आरोप यह है कि इतने बड़े बजट वाले प्रस्ताव को बिना किसी पूर्व सूचना या चर्चा के 'टेबल एजेंडा' के रूप में अंतिम समय पर लाया गया। आमतौर पर, नगर निगम की बैठकों में महत्वपूर्ण विकास कार्यों और बजट संबंधी प्रस्तावों को पहले से सदस्यों के साथ साझा किया जाता है ताकि उन पर विस्तार से चर्चा की जा सके। विपक्षी पार्षदों का कहना है कि 227 करोड़ रुपये जैसी बड़ी राशि के आवंटन को बिना पारदर्शिता के पारित कराने की कोशिश की जा रही है। सदन के भीतर विपक्षी पार्षदों ने नारेबाजी की और मेयर के आसन के करीब पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। उनका तर्क है कि शहर के विकास से जुड़े इतने बड़े प्रोजेक्ट्स पर जल्दबाजी में निर्णय लेना करदाताओं के पैसे का अपमान है। विरोध करने वालों में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के पार्षद शामिल थे, जिन्होंने मांग की कि इस एजेंडे को वापस लिया जाए और अगली बैठक में पूरी विस्तृत रिपोर्ट के साथ पेश किया जाए। दूसरी ओर, सत्तापक्ष और निगम अधिकारियों का कहना है कि ये प्रोजेक्ट शहर की बुनियादी सुविधाओं, विशेष रूप से सड़कों के रख-रखाव और स्वच्छता प्रणालियों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उनका तर्क है कि विकास कार्यों में देरी से शहर की रैंकिंग और जनता को मिलने वाली सुविधाओं पर असर पड़ेगा। हालांकि, विपक्ष इस दलील से संतुष्ट नहीं दिखा और सदन में शोर-शराबा जारी रहा। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे प्रवासी भारतीय समुदाय, विशेष रूप से वे जो पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ (ट्राईसिटी) क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं, उनके लिए चंडीगढ़ की स्थानीय राजनीति और विकास की खबरें काफी महत्व रखती हैं। कई अनिवासी भारतीय (NRI) चंडीगढ़ में संपत्ति रखते हैं और शहर के बुनियादी ढांचे के विकास में उनकी गहरी रुचि रहती है। नगर निगम में इस तरह के गतिरोध और बजट संबंधी विवाद अक्सर विदेशी निवेश और प्रवासियों के भरोसे को प्रभावित करते हैं। फिलहाल, इस हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि क्या यह एजेंडा आधिकारिक रूप से पारित मान लिया गया है या इसे अगली बैठक के लिए टाला जाएगा। शहर के जागरूक नागरिकों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पारदर्शी शासन के लिए इस तरह के बड़े वित्तीय निर्णयों पर खुली चर्चा अनिवार्य है।
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