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कावेरी जल विवाद: तमिलनाडु को पानी देने के फैसले पर कर्नाटक में भारी विरोध, मांड्या में सुरक्षा सख्त

ICN24 Newsroom 31 जुल॰ 2026, 06:36 pm
कावेरी जल विवाद: तमिलनाडु को पानी देने के फैसले पर कर्नाटक में भारी विरोध, मांड्या में सुरक्षा सख्त

कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) द्वारा तमिलनाडु को पानी छोड़ने के आदेश के बाद कर्नाटक के मांड्या में किसानों और कन्नड़ संगठनों ने उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

कर्नाटक में कावेरी नदी के जल बंटवारे को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) द्वारा तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने के हालिया आदेश के विरोध में मांड्या जिले और कृष्णा राज सागर (KRS) बांध के आसपास के इलाकों में किसानों और विभिन्न कन्नड़ संगठनों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इस स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मांड्या में 1,500 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कर्नाटक खुद इस समय जल संकट और सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहा है, ऐसे में पड़ोसी राज्य को पानी छोड़ना राज्य के किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ है। प्रदर्शनकारियों ने केआरएस बांध की ओर मार्च करने की कोशिश की, जिसे पुलिस ने सुरक्षा घेरा बनाकर रोक दिया। मांड्या जिले के विभिन्न हिस्सों में सड़कों पर उतरकर किसानों ने सरकार और प्राधिकरण के खिलाफ नारेबाजी की। स्थानीय किसान नेताओं का तर्क है कि यदि मौजूदा भंडार से पानी छोड़ा गया, तो आने वाले महीनों में राज्य में पीने के पानी और खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए भारी किल्लत हो जाएगी। सुरक्षा के दृष्टिकोण से पुलिस ने केआरएस बांध और प्रमुख राजमार्गों पर नाकाबंदी कर दी है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए अतिरिक्त रिजर्व पुलिस बल (KSRP) की टुकड़ियों को भी तैनात किया गया है। मांड्या के जिला प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में धारा 144 लागू करने पर भी विचार किया है ताकि भीड़ को इकट्ठा होने से रोका जा सके। कावेरी जल विवाद दशकों पुराना है और यह कर्नाटक व तमिलनाडु के बीच तनाव का एक प्रमुख कारण रहा है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए भी यह खबर चिंता का विषय है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले कई प्रवासी भारतीय मूल रूप से इन राज्यों से ताल्लुक रखते हैं और उनके परिवार सीधे तौर पर कृषि गतिविधियों से जुड़े हैं। पानी की कमी का असर न केवल फसलों की पैदावार पर पड़ता है, बल्कि यह क्षेत्रीय राजनीति और सामाजिक सद्भाव को भी प्रभावित करता है। फिलहाल, कर्नाटक सरकार इस मामले में कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ले रही है ताकि सुप्रीम कोर्ट में राज्य का पक्ष मजबूती से रखा जा सके। मुख्यमंत्री कार्यालय ने शांति की अपील की है, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की अनिश्चितता ने इस साल विवाद को और अधिक संवेदनशील बना दिया है, जिससे दोनों राज्यों के बीच कूटनीतिक और कानूनी टकराव बढ़ने की आशंका है।
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