इमिकास्ट
अमेरिकी ग्रीन कार्ड नीति पर व्यापारिक दबाव: उद्योग जगत के हस्तक्षेप के बाद नियमों में ढील
ICN24 Newsroom 6 जून 2026, 01:00 pm
अमेरिकी व्यापारिक दिग्गजों के दबाव के बाद सरकार ने ग्रीन कार्ड नियमों में ढील दी है, जिससे भारतीय पेशेवरों सहित हजारों विदेशी श्रमिकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
वाशिंगटन से आई एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी व्यापारिक घरानों और उद्योग जगत के दिग्गजों ने ग्रीन कार्ड नीति को लेकर जो बाइडन प्रशासन पर अपना प्रभाव डाला है। शुरुआती प्रस्तावों में विदेशी श्रमिकों के लिए कड़े नियम लागू करने की योजना थी, जिसमें आवेदकों को स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) की प्रक्रिया के दौरान अपने देश वापस जाने की आवश्यकता शामिल थी। हालांकि, कॉर्पोरेट जगत के कड़े विरोध के बाद प्रशासन ने अपने रुख में नरमी दिखाई है।
इस नीतिगत बदलाव का सबसे अधिक प्रभाव भारतीय पेशेवरों पर पड़ने की संभावना है, जो वर्तमान में एच-1बी (H-1B) वीजा पर अमेरिका में कार्यरत हैं। उद्योग जगत के नेताओं का तर्क था कि यदि अनुभवी विदेशी कर्मचारियों को प्रक्रिया के लिए मजबूरन वापस भेजा गया, तो इससे न केवल परिचालन में बाधा आएगी, बल्कि अमेरिका की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को भी नुकसान पहुंचेगा। इस संबंध में व्हाइट हाउस और विभिन्न सरकारी विभागों के साथ कई निजी बैठकें आयोजित की गईं, जिनमें व्यापारिक समूहों ने श्रम शक्ति की कमी और आर्थिक अस्थिरता का हवाला दिया।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के संदर्भ में देखें तो यह घटनाक्रम वैश्विक स्तर पर कुशल प्रवासियों के लिए बदलती नीतियों का संकेत देता है। ऑस्ट्रेलिया में भी भारतीय समुदाय की एक बड़ी आबादी तकनीकी और स्वास्थ्य क्षेत्रों में कार्यरत है। अमेरिका में नियमों का सरल होना यह दर्शाता है कि विकसित देशों की अर्थव्यवस्थाएं अपनी प्रगति के लिए विदेशी प्रतिभाओं पर कितनी निर्भर हैं। व्यापारिक समूहों ने स्पष्ट किया कि कड़े आव्रजन नियम न केवल कंपनियों के लिए महंगे साबित होते हैं, बल्कि वे शीर्ष स्तर की वैश्विक प्रतिभा को आकर्षित करने की क्षमता को भी कम करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह 'सॉफ्ट स्टांस' अस्थायी नहीं है, बल्कि यह भविष्य की आव्रजन नीतियों के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है। रिपोर्ट बताती है कि तकनीकी कंपनियों ने विशेष रूप से यह मुद्दा उठाया कि अनिश्चितता के कारण कई कर्मचारी पहले से ही कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों का रुख कर रहे हैं, जहां स्थायी निवास की प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल और अधिक अनुमानित है।
फिलहाल, इस नीतिगत नरमी से उन हजारों भारतीय परिवारों को बड़ी राहत मिली है जो लंबे समय से ग्रीन कार्ड बैकलॉग का सामना कर रहे हैं। हालांकि, आव्रजन सुधार के समर्थकों का कहना है कि जब तक विधायी स्तर पर ठोस बदलाव नहीं होते, तब तक व्यापारिक दबाव के माध्यम से मिलने वाली यह राहत केवल एक अल्पकालिक समाधान है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह प्रभाव अन्य वीजा श्रेणियों और कार्य परमिट नियमों तक भी विस्तारित होता है।
संबंधित ख़बरें
इमिग्रेशन
यूएई में भारतीय पासपोर्ट और वीजा सेवाओं पर 5 दिनों का विराम, 26 जून से सेवाएं रहेंगी निलंबित
यूएई में भारतीय मिशनों ने पासपोर्ट और वीजा सेवाओं में बदलाव की घोषणा की है। 26 से 30 जून तक सेवाएं बंद रहेंगी और 1 जुलाई से नया प्रदाता कार्यभार संभालेगा।
20 जून 2026, 12:23 pm

इमिग्रेशन
ईरान की फीफा से शिकायत: विश्व कप के दौरान अमेरिकी यात्रा प्रतिबंधों पर जताया कड़ा विरोध
ईरानी फुटबॉल महासंघ ने 2026 विश्व कप के दौरान अमेरिका की वीजा पाबंदियों के खिलाफ फीफा में शिकायत दर्ज करने की घोषणा की है। कोच ने टीम को 'सबसे उत्पीड़ित' बताया।
20 जून 2026, 12:09 pm

इमिग्रेशन
कैलाश मानसरोवर यात्रा: सरकार ने नाथू ला और लिपुलेख ला चेक पोस्ट को दी आधिकारिक मंजूरी
भारत सरकार ने 20 जून से शुरू होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए सिक्किम के नाथू ला और उत्तराखंड के लिपुलेख ला को अस्थायी आव्रजन चौकियों के रूप में अधिसूचित किया है।
20 जून 2026, 11:52 am

