ऑस्ट्रेलिया
ब्रिटेन में भीषण वनाग्नि का संकट: एंडी बर्नहैम ने देश को 'बारूद के ढेर' पर बताया, ऑस्ट्रेलिया के लिए भी चेतावनी
ICN24 Newsroom 15 अग॰ 2026, 08:37 am

ब्रिटिश नेता एंडी बर्नहैम ने भीषण गर्मी और दर्जनों जगहों पर लगी आग के बीच ब्रिटेन को 'बारूद का ढेर' करार दिया है।
ब्रिटेन इस समय एक अभूतपूर्व प्राकृतिक संकट से जूझ रहा है, जहां देश के विभिन्न हिस्सों में लगी भीषण वनाग्नि (wildfires) ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। इस गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए ब्रिटिश नेता एंडी बर्नहैम ने चेतावनी दी है कि वर्तमान में ब्रिटेन एक 'बारूद के ढेर' (tinderbox) के समान हो गया है। उनके इस बयान ने न केवल ब्रिटेन, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता पैदा कर दी है, विशेष रूप से उन देशों में जो पहले से ही जलवायु परिवर्तन के कारण आग की विभीषिका झेल रहे हैं।
बर्नहैम की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब ब्रिटेन के दमकल विभाग दर्जनों सक्रिय वनाग्नि की घटनाओं पर काबू पाने के लिए दिन-रात संघर्ष कर रहे हैं। रिकॉर्ड तोड़ तापमान और लंबे समय से जारी सूखे ने घास के मैदानों और जंगलों को अत्यंत ज्वलनशील बना दिया है। बर्नहैम ने स्पष्ट किया कि स्थितियां इतनी नाजुक हैं कि एक छोटी सी चिंगारी भी बड़े विनाश का कारण बन सकती है। उन्होंने नागरिकों से अत्यधिक सावधानी बरतने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। ऑस्ट्रेलिया, जो स्वयं 'ब्लैक समर' जैसे विनाशकारी बुशफायर का सामना कर चुका है, इस संकट की गंभीरता को भली-भांति समझता है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले कई प्रवासी भारतीयों के रिश्तेदार ब्रिटेन में बसे हुए हैं। लंदन, मैनचेस्टर और बर्मिंघम जैसे क्षेत्रों के आसपास लगी आग ने उन परिवारों की चिंता बढ़ा दी है जिनके परिजन वहां रह रहे हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि जलवायु परिवर्तन अब केवल एक क्षेत्रीय समस्या नहीं, बल्कि एक वैश्विक संकट बन चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन का बुनियादी ढांचा इस तरह की अत्यधिक गर्मी और वनाग्नि के लिए तैयार नहीं है। ऑस्ट्रेलिया के विपरीत, जहां घरों और सार्वजनिक सेवाओं को अक्सर गर्मी को ध्यान में रखकर बनाया जाता है, ब्रिटेन की पुरानी इमारतों में वेंटिलेशन और कूलिंग की कमी है, जिससे स्थिति और भी भयावह हो जाती है। ऑस्ट्रेलियाई अग्निशमन विशेषज्ञों ने भी पूर्व में चेतावनी दी थी कि उत्तरी गोलार्द्ध के देशों को अब ऑस्ट्रेलिया की तरह 'फायर-रेडी' रणनीति अपनानी होगी।
दमकल सेवाओं पर बढ़ते दबाव ने संसाधनों की कमी को भी उजागर किया है। कई क्षेत्रों में फायर ब्रिगेड को मदद के लिए सेना का सहारा लेना पड़ा है। ब्रिटेन की इस स्थिति ने वैश्विक स्तर पर पर्यावरण नीतियों पर फिर से बहस छेड़ दी है। आईसीएम24 (ICN24) से बात करते हुए पर्यावरण विश्लेषकों ने कहा कि यदि कार्बन उत्सर्जन पर लगाम नहीं लगाई गई, तो आने वाले वर्षों में ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में ऐसी घटनाएं और अधिक बार और अधिक तीव्रता के साथ होंगी।
फिलहाल, ब्रिटेन में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे बाहरी गतिविधियों से बचें और अपने स्थानीय काउंसिल के अलर्ट्स पर नजर रखें। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले उनके शुभचिंतक भी सोशल मीडिया और फोन के माध्यम से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। यह संकट हमें याद दिलाता है कि प्रकृति की चेतावनी को नजरअंदाज करना कितना महंगा पड़ सकता है।
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