राजनीति
बिहार में बड़ा उलटफेर: भाजपा का अभेद्य किला 'बांकीपुर' ढहा, प्रशांत किशोर की जन सुराज ने रचा इतिहास
ICN24 Newsroom 4 अग॰ 2026, 07:37 am

बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ आया है जहाँ 1995 से भाजपा का गढ़ रही बांकीपुर विधानसभा सीट पर प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने जीत दर्ज की है।
बिहार की राजनीति में एक नए युग की आहट सुनाई दे रही है। राजधानी पटना की सबसे प्रतिष्ठित और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली बांकीपुर विधानसभा सीट पर 'जन सुराज' ने बड़ी जीत हासिल कर राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है। चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर की पार्टी ने उस किले को ढहा दिया है जिसे भाजपा ने 1995 से अब तक अजेय बनाए रखा था। यह जीत न केवल भाजपा के लिए एक बड़ा झटका है, बल्कि यह बिहार में स्थापित गठबंधन की राजनीति के लिए एक गंभीर चुनौती भी है।
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र दशकों से भाजपा का पर्याय बना हुआ था। इस क्षेत्र में मध्यम वर्ग और शहरी मतदाताओं की बहुलता है, जिन्हें भाजपा का पारंपरिक वोट बैंक माना जाता है। पिछले करीब तीन दशकों में राजद, कांग्रेस या अन्य क्षेत्रीय दल इस सीट पर सेंध लगाने में नाकाम रहे थे। हालांकि, प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने अपने जमीनी स्तर के प्रचार और 'व्यवस्था परिवर्तन' के नारे के साथ मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को अपनी ओर खींचने में सफलता प्राप्त की है।
चुनावी नतीजों पर नजर डालें तो जन सुराज के उम्मीदवार ने अपनी स्पष्ट बढ़त शुरुआत से ही बनाए रखी थी। जानकारों का मानना है कि प्रशांत किशोर की लंबी पदयात्रा और युवाओं के बीच शिक्षा व रोजगार को लेकर किए गए वादों ने इस शहरी क्षेत्र में काम किया है। भाजपा के लिए यह हार इसलिए भी अधिक चिंताजनक है क्योंकि यह सीट उनके वैचारिक और सांगठनिक प्रभाव का केंद्र रही है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेषकर बिहार और उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले प्रवासियों के बीच भी इस चुनावी परिणाम की काफी चर्चा है। सिडनी और मेलबर्न में रहने वाले बिहार मूल के लोग इस बदलाव को राज्य की राजनीति में 'तीसरे विकल्प' के उदय के रूप में देख रहे हैं।
प्रशांत किशोर ने इस जीत को 'बिहार के स्वाभिमान की जीत' बताया है। उन्होंने कहा कि यह परिणाम साबित करता है कि जनता अब जातिगत समीकरणों और पुराने गठबंधन से ऊब चुकी है और विकास का एक नया मॉडल चाहती है। जन सुराज की यह जीत आगामी 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। इससे यह स्पष्ट होता है कि बिहार के शहरी क्षेत्रों में भी अब भाजपा की पकड़ ढीली हो सकती है यदि वे स्थानीय मुद्दों और जनभावनाओं को नजरअंदाज करते हैं।
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि बांकीपुर का यह परिणाम राष्ट्रीय स्तर पर भी संदेश देगा। जिस तरह से एक नई पार्टी ने बिना किसी बड़े गठबंधन के भाजपा के सबसे मजबूत गढ़ को जीता है, वह अन्य राज्यों के लिए भी एक केस स्टडी बन सकता है। फिलहाल, बांकीपुर की सड़कों पर जन सुराज के समर्थकों का उत्साह चरम पर है और बिहार की सत्ता के गलियारों में इस अप्रत्याशित हार पर मंथन का दौर शुरू हो गया है।
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