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कभी ‘अभिशाप’ थी कोसी, अब बनेगी वरदान: कोसी-मेची लिंक परियोजना से सीमांचल के 2.14 लाख हेक्टेयर खेतों को मिलेगा पानी

ICN24 Newsroom 20 अग॰ 2026, 08:37 pm
कभी ‘अभिशाप’ थी कोसी, अब बनेगी वरदान: कोसी-मेची लिंक परियोजना से सीमांचल के 2.14 लाख हेक्टेयर खेतों को मिलेगा पानी

बिहार की महत्वाकांक्षी कोसी-मेची नदी जोड़ो परियोजना को गति मिल गई है। ₹6,282 करोड़ की इस योजना से पूर्णिया और सीमांचल के 2.14 लाख हेक्टेयर खेतों में सिंचाई की सुविधा मिलेगी।

बिहार के सीमांचल क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ पर, कोसी-मेची अंतरराज्यीय नदी जोड़ो परियोजना अब हकीकत बनने की दिशा में अग्रसर है। जिस कोसी नदी को दशकों से 'बिहार का शोक' कहा जाता रहा है, वह अब अपनी विनाशकारी पहचान को पीछे छोड़कर क्षेत्र की समृद्धि का आधार बनेगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर कुल ₹6,282.32 करोड़ की लागत आने का अनुमान है, जो बिहार के कृषि परिदृश्य को पूरी तरह से बदलने की क्षमता रखती है। इस परियोजना का प्राथमिक उद्देश्य कोसी नदी के अतिरिक्त पानी को मेची नदी में स्थानांतरित करना है। इससे न केवल मानसून के दौरान आने वाली विनाशकारी बाढ़ के प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी, बल्कि सीमांचल के चार प्रमुख जिलों—पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज और अररिया—के लगभग 2.14 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को बारहमासी सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। स्थानीय किसानों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि वे लंबे समय से अनियमित मानसूनी बारिश और बाढ़ की दोहरी मार झेल रहे थे। तकनीकी दृष्टिकोण से, यह परियोजना देश की दूसरी सबसे बड़ी नदी जोड़ो परियोजना मानी जा रही है। इसके तहत कोसी की मुख्य नहर से पानी को मेची नदी तक पहुँचाने के लिए एक लंबी नहर प्रणाली विकसित की जाएगी। इससे भूमिगत जल स्तर में भी सुधार होने की उम्मीद है, जो सूखे के दौरान पेयजल की समस्या को दूर करने में सहायक सिद्ध होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस जल प्रबंधन रणनीति से धान, मक्का और जूट जैसी फसलों की पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति सुधरेगी। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे प्रवासी भारतीय, विशेषकर वे जो बिहार और उत्तर भारत के कृषि प्रधान क्षेत्रों से ताल्लुक रखते हैं, इस विकास को बड़ी उम्मीदों के साथ देख रहे हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसे बिहारी समुदाय के लिए अपनी जड़ों से जुड़ाव और वहां के बुनियादी ढांचे में सुधार हमेशा से चर्चा का विषय रहा है। आधुनिक सिंचाई तकनीकों का उपयोग और इस तरह की बड़ी परियोजनाओं का क्रियान्वयन उन प्रवासियों को भी प्रोत्साहित करता है जो अपनी पैतृक भूमि पर निवेश करने या कृषि-तकनीक (Agri-tech) के क्षेत्र में सहयोग करने के इच्छुक हैं। सरकार का लक्ष्य इस परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करना है ताकि सीमांचल के किसानों को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके। यह परियोजना न केवल सिंचाई प्रदान करेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा करेगी। पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखते हुए डिजाइन की गई यह योजना भविष्य में बिहार के जल संकट और बाढ़ नियंत्रण के बीच एक सेतु का काम करेगी।
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