राजनीति
एक्शन मोड में बिहार के स्वास्थ्य मंत्री: PMCH के डॉक्टर सरफराज आलम पर गिरी गाज, गंभीर शिकायतों के बाद पद से हटाया
ICN24 Newsroom 4 जुल॰ 2026, 02:31 am

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने PMCH के डॉक्टर सरफराज आलम को पद से हटा दिया है। यह कार्रवाई औचक निरीक्षण और गंभीर शिकायतों के बाद की गई है।
बिहार के स्वास्थ्य विभाग में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (PMCH) के डॉक्टर सरफराज आलम के खिलाफ कड़ा फैसला लिया है। मंत्री ने डॉक्टर सरफराज को उनके पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। यह निर्णय डॉक्टर के खिलाफ मिलीं लगातार गंभीर शिकायतों और विभाग द्वारा की गई प्रारंभिक जांच के बाद लिया गया है।
घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने बिना किसी पूर्व सूचना के PMCH का औचक दौरा किया। इस दौरे के दौरान उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और मरीजों से सीधा संवाद किया। निरीक्षण के दौरान यह बात सामने आई कि कई विभागों में अनुशासन की कमी है और कुछ वरिष्ठ डॉक्टर अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाही बरत रहे हैं। डॉक्टर सरफराज आलम के मामले में शिकायतें काफी समय से लंबित थीं, जिनमें मरीजों के इलाज में कोताही और ड्यूटी के समय अनुपस्थिति जैसे गंभीर आरोप शामिल थे।
निशांत कुमार ने मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य के सरकारी अस्पतालों में लापरवाही को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'हमारा लक्ष्य बिहार की स्वास्थ्य सेवाओं को पारदर्शी और मरीज-केंद्रित बनाना है। जो भी डॉक्टर या कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहेगा, उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।' मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले दिनों में अन्य बड़े अस्पतालों में भी इसी तरह के औचक निरीक्षण किए जाएंगे ताकि व्यवस्था में सुधार लाया जा सके।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे प्रवासी भारतीय समुदाय, विशेष रूप से जो बिहार मूल के हैं, उनके लिए यह खबर काफी महत्वपूर्ण है। विदेशों में रहने वाले भारतीय अक्सर अपने पीछे रह गए बुजुर्ग माता-पिता और परिवार की सेहत को लेकर चिंतित रहते हैं। बिहार के सबसे बड़े अस्पताल PMCH में प्रशासनिक सुधार और डॉक्टरों की जवाबदेही तय होने से उन प्रवासियों को राहत मिलती है जो दूर रहकर भी अपने परिवार के बेहतर इलाज की उम्मीद करते हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसे बिहार प्रवासियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अक्सर राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की मांग की है।
डॉक्टर सरफराज आलम को हटाए जाने के बाद अब अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। स्वास्थ्य विभाग ने एक उच्च स्तरीय समिति का भी गठन किया है जो अन्य डॉक्टरों की उपस्थिति और उनके कार्य प्रदर्शन की समीक्षा करेगी। सरकार की इस 'जीरो टॉलरेंस' नीति का उद्देश्य स्वास्थ्य ढांचे में जनता के विश्वास को बहाल करना है। स्वास्थ्य मंत्री की इस कार्रवाई को राज्य की राजनीति में प्रशासनिक पकड़ मजबूत करने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है।
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