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बिहार सरकार का बड़ा फैसला: प्रवासी श्रमिकों के पार्थिव शरीर को घर लाने का खर्च उठाएगी सरकार, मुआवजा राशि भी हुई दोगुनी
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 01:39 am
बिहार सरकार अब दूसरे राज्यों या विदेशों में जान गंवाने वाले प्रवासी श्रमिकों के पार्थिव शरीर को वापस लाने का पूरा खर्च उठाएगी और परिजनों को मिलने वाली आर्थिक मदद भी बढ़ा दी गई है।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में प्रवासी श्रमिकों के हित में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील निर्णय लिया गया है। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि अब अन्य राज्यों या विदेशों में काम के दौरान जान गंवाने वाले बिहार के प्रवासी श्रमिकों के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव तक लाने का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी। इसके साथ ही, मृतक के आश्रितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि (Ex-gratia) को 2 लाख रुपये से बढ़ाकर अब 4 लाख रुपये कर दिया गया है।
यह निर्णय उन हजारों परिवारों के लिए एक बड़ी राहत बनकर आया है, जो रोजी-रोटी की तलाश में अपने परिजनों को दूर भेजते हैं। अक्सर देखा गया है कि किसी हादसे या बीमारी की स्थिति में श्रमिक की मृत्यु हो जाने पर गरीब परिवारों के पास पार्थिव शरीर को वापस लाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होते। अब नई नीति के तहत, राज्य का श्रम संसाधन विभाग इन खर्चों की प्रतिपूर्ति करेगा। यदि परिवार स्वयं परिवहन की व्यवस्था करता है, तो सरकार उन्हें निर्धारित खर्च वापस करेगी, या फिर विभाग सीधे तौर पर शव को लाने का समन्वय करेगा।
कैबिनेट के फैसले के अनुसार, यह लाभ उन सभी पंजीकृत और अपंजीकृत श्रमिकों को मिलेगा जो बिहार के बाहर काम कर रहे हैं। 4 लाख रुपये की बढ़ी हुई मुआवजा राशि उन मामलों में देय होगी जहां श्रमिक की मृत्यु दुर्घटना या किसी प्राकृतिक आपदा के कारण हुई हो। इसके अलावा, स्थायी रूप से दिव्यांग होने वाले श्रमिकों के लिए भी वित्तीय सहायता के प्रावधानों में संशोधन किया गया है।
ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों में रह रहे बिहारी मूल के समुदाय ने भी इस कदम की सराहना की है। हालांकि ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लोग तुलनात्मक रूप से बेहतर आर्थिक स्थिति में हैं, लेकिन यह नीति विशेष रूप से खाड़ी देशों (Gulf countries) और भारत के अन्य महानगरों में काम कर रहे उन ब्लू-कॉलर श्रमिकों के लिए जीवनदान साबित होगी, जो बिहार की अर्थव्यवस्था में रेमिटेंस के माध्यम से बड़ा योगदान देते हैं। प्रवासी समुदायों का मानना है कि राज्य सरकार का यह कदम यह संदेश देता है कि सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान के प्रति गंभीर है, चाहे वे दुनिया के किसी भी कोने में हों।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार जैसे राज्य के लिए, जहां से पलायन की दर काफी अधिक है, ऐसी सामाजिक सुरक्षा योजनाएं अनिवार्य हैं। यह न केवल प्रभावित परिवारों को तत्काल वित्तीय संकट से उबारती हैं, बल्कि संकट की घड़ी में उन्हें प्रशासनिक सहायता भी सुनिश्चित करती हैं। सरकार ने संबंधित जिलाधिकारियों और श्रम विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस प्रक्रिया को सरल बनाया जाए ताकि पीड़ित परिवारों को सहायता प्राप्त करने के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
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