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भोपाल: रिहाइशी इलाकों में व्यावसायिक अतिक्रमण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, रहवासियों ने सुनाई 'मॉल और शोरूम' के बीच रहने की पीड़ा

ICN24 Newsroom 9 अग॰ 2026, 11:37 am
भोपाल: रिहाइशी इलाकों में व्यावसायिक अतिक्रमण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, रहवासियों ने सुनाई 'मॉल और शोरूम' के बीच रहने की पीड़ा

भोपाल के रिहाइशी इलाकों में अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम ने सर्वे शुरू कर दिया है, जिससे करीब 1 लाख प्रॉपर्टी पर असर पड़ने की संभावना है।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग को लेकर कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट की हालिया सख्ती के बाद भोपाल नगर निगम (BMC) ने शहर में एक व्यापक सर्वे शुरू किया है, जिसके तहत 15 सितंबर तक उन संपत्तियों की पहचान की जाएगी जो रिकॉर्ड में आवासीय हैं, लेकिन वहां शोरूम, मॉल या अन्य व्यापारिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। शुरुआती आकलन के अनुसार, शहर में ऐसी लगभग एक लाख संपत्तियां हैं। इस कानूनी लड़ाई के केंद्र में भोपाल की पॉश 'अरेरा कॉलोनी' और '10 नंबर मार्केट' जैसे इलाके हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जब धरातल पर स्थिति का जायजा लिया गया, तो स्थानीय रहवासियों का दर्द छलक पड़ा। अरेरा कॉलोनी ई-4 के निवासी लवनीश भाटी, जो 1998 से यहां रह रहे हैं, बताते हैं कि पिछले एक दशक में रिहाइशी शांति पूरी तरह खत्म हो गई है। उन्होंने बताया कि मोहल्ले के अंदर अब मॉल और तीन-चार मंजिला व्यावसायिक इमारतें खड़ी हो गई हैं। चाय बार और शराब की दुकानों के कारण दोपहर से देर रात तक भीड़ जमा रहती है, जिससे न केवल ट्रैफिक जाम की समस्या होती है, बल्कि खुलेआम स्मोकिंग से पड़ोसियों की सेहत पर भी बुरा असर पड़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर याचिका दायर करने वाले विवेक त्रिपाठी का कहना है कि उन्होंने अरेरा कॉलोनी में प्लॉट इसलिए लिया था ताकि परिवार सुकून से रह सके। त्रिपाठी के अनुसार, 2015 के बाद भू-माफियाओं ने आवासीय नक्शों पर मॉल और शोरूम खड़े कर दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम ने लंबे समय तक इन अवैध निर्माणों पर आंखें मूंदे रखीं। याचिका में यह भी मुद्दा उठाया गया कि मंदिर के ठीक सामने शराब की दुकानें खोल दी गईं, जो रहवासियों के मौलिक अधिकारों का हनन है। न्यायिक रुख की बात करें तो 5 अगस्त को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आवासीय क्षेत्रों में अवैध निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा दुकान संचालकों को दिए गए सभी अंतरिम राहत आदेशों (स्टे) को भी सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर दिया है। अब नगर निगम को 15 सितंबर तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट अदालत में पेश करनी है। दूसरी ओर, इस कार्रवाई से व्यापारिक जगत में हड़कंप है। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स का दावा है कि इस फैसले से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 5 लाख लोगों की आजीविका प्रभावित होगी। व्यापारियों का तर्क है कि बढ़ती शहरी जरूरतों को देखते हुए सरकार को 'मिक्स लैंड यूज' (मिश्रित भूमि उपयोग) नीति लागू करनी चाहिए। फिलहाल, नगर निगम की टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संपत्तियों को सील करने की तैयारी है।
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