राजनीति
संभल: अधिवक्ता ने पुलिस सिपाही पर लगाया अभद्रता का आरोप, बार एसोसिएशन में भारी रोष
ICN24 Newsroom 9 अग॰ 2026, 08:37 am

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में एक अधिवक्ता ने पुलिस सिपाही पर बदसलूकी और अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया है, जिससे स्थानीय विधिक समुदाय में आक्रोश व्याप्त है।
उत्तर प्रदेश के संभल जिले से पुलिस और विधिक समुदाय के बीच टकराव की एक नई घटना सामने आई है। यहाँ एक स्थानीय अधिवक्ता ने पुलिस विभाग के एक सिपाही पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि उनके साथ सार्वजनिक रूप से अभद्रता और दुर्व्यवहार किया गया। इस घटना के बाद से ही संभल के विधिक गलियारों में तनाव का माहौल है और वकीलों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित अधिवक्ता किसी विधिक कार्य के सिलसिले में पुलिस के संपर्क में आए थे। आरोप है कि बातचीत के दौरान संबंधित सिपाही ने अपनी मर्यादा की सीमाएं लांघते हुए अधिवक्ता के साथ न केवल ऊंची आवाज में बात की, बल्कि अपमानजनक शब्दों का भी प्रयोग किया। अधिवक्ता का कहना है कि एक लोक सेवक द्वारा इस तरह का व्यवहार न केवल व्यक्तिगत अपमान है, बल्कि यह पूरी कानूनी बिरादरी की गरिमा पर चोट है।
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय बार एसोसिएशन ने इस मामले का संज्ञान लिया। बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने एक आपातकालीन बैठक बुलाई, जिसमें सर्वसम्मति से सिपाही के व्यवहार की निंदा की गई। एसोसिएशन ने जिला पुलिस अधीक्षक (SP) को एक लिखित ज्ञापन सौंपकर आरोपी सिपाही के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्यवाही करने की मांग की है। वकीलों का तर्क है कि यदि न्याय के रक्षक और कानून के प्रवर्तकों के बीच इस तरह का मनमुटाव रहेगा, तो सामान्य नागरिकों के लिए न्याय की राह और भी कठिन हो जाएगी।
पुलिस प्रशासन की ओर से इस मामले में संतुलित रुख अपनाने की कोशिश की गई है। वरिष्ठ अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी। पुलिस का कहना है कि विवाद के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। हालांकि, संभल के अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि आरोपी के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो वे विरोध प्रदर्शन तेज करेंगे और कार्य बहिष्कार जैसे कदम उठाने को मजबूर होंगे।
यह घटना उत्तर प्रदेश में पुलिस और वकीलों के बीच पुराने और संवेदनशील संबंधों को एक बार फिर चर्चा में ले आई है। अक्सर देखा गया है कि अधिकारों के टकराव और कार्यप्रणाली के मतभेद के कारण ऐसी घटनाएं होती रहती हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के प्रवासियों के लिए भी यह समाचार चिंता का विषय है, क्योंकि वे भारत में सुशासन और कानून के शासन (Rule of Law) को मजबूत होते देखना चाहते हैं। इस तरह की घटनाएं प्रशासनिक सुधारों की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं ताकि पेशेवर मर्यादा बनी रहे।
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