राजनीति
भारतीय परिवारों में 'आई लव यू' की जगह क्यों लेते हैं रोजमर्रा के काम: प्रवासी समुदाय के लिए एक भावनात्मक विश्लेषण
ICN24 Newsroom 6 जून 2026, 02:00 am

भारतीय और दक्षिण एशियाई परिवारों में प्रेम व्यक्त करने का तरीका पश्चिमी संस्कृति से अलग है। यहाँ शब्द नहीं, बल्कि रोजमर्रा के छोटे-छोटे कार्य स्नेह का प्रतीक बनते हैं।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए सांस्कृतिक सामंजस्य हमेशा से एक चुनौती और अवसर दोनों रहा है। हाल ही में सामाजिक विमर्श में एक महत्वपूर्ण विषय उभरा है—स्नेह और प्यार व्यक्त करने के अलग-अलग तरीके। जहाँ पश्चिमी संस्कृति में 'आई लव यू' (I love you) कहना एक सामान्य प्रक्रिया है, वहीं भारतीय और दक्षिण एशियाई परिवारों में स्नेह की परिभाषा अक्सर शब्दों के बजाय कर्मों में छिपी होती है।
प्रवासी भारतीयों की दूसरी पीढ़ी अक्सर एक दुविधा में पली-बढ़ी है। एक तरफ स्कूल और बाहर की दुनिया में भावनाओं को खुले तौर पर जाहिर करने का चलन है, तो दूसरी तरफ घर के भीतर एक अलग दुनिया है। यहाँ माता-पिता अपने बच्चों के प्रति प्रेम को काटकर दिए गए फलों के कटोरे, गरमा-गरम खाने, या फिर पढ़ाई और भविष्य को लेकर की जाने वाली टोका-टाकी के जरिए जाहिर करते हैं। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि यह 'सेवा भाव' (acts of service) भारतीय परवरिश का एक अभिन्न हिस्सा है, जिसे कई बार पश्चिमी चश्मे से देखने पर गलत समझ लिया जाता है।
सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसे भारतीय परिवारों के अनुभवों पर गौर करें, तो एक पैटर्न सामने आता है। कई युवाओं का कहना है कि उन्होंने कभी अपने पिता या माँ को सीधे तौर पर प्रेम व्यक्त करते नहीं सुना, लेकिन जब भी वे किसी मुश्किल में होते हैं या बीमार पड़ते हैं, तो माता-पिता का बिना मांगे मदद के लिए खड़ा होना ही उनका 'आई लव यू' होता है। आलोचना और अनुशासन, जो भारतीय परिवारों में आम हैं, अक्सर सुरक्षा की गहरी भावना से प्रेरित होते हैं।
सांस्कृतिक विशेषज्ञों का कहना है कि प्रवासी परिवारों में यह अंतर और भी स्पष्ट हो जाता है। जब बच्चे ऑस्ट्रेलियाई संस्कृति के प्रभाव में आकर अधिक मुखर हो जाते हैं, तो उन्हें अपने माता-पिता के 'मौन प्रेम' को समझने में समय लगता है। हालांकि, परिपक्वता के साथ, कई लोग अब यह समझने लगे हैं कि स्नेह केवल शब्दों तक सीमित नहीं है। किसी के लिए पसंदीदा डिश बनाना, एयरपोर्ट पर घंटों इंतजार करना या बच्चे की सफलता के लिए दुआएं मांगना, वास्तव में प्यार की एक गहरी भाषा है।
अंततः, यह समझना महत्वपूर्ण है कि प्यार की कोई एक सार्वभौमिक भाषा नहीं होती। भारतीय समुदाय में यह मौन समर्पण और निरंतर देखभाल का रूप लेता है। जैसे-जैसे भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय अपनी पहचान को और सुदृढ़ कर रहा है, वैसे-वैसे अपनी जड़ों और परवरिश के इन अनकहे पहलुओं को स्वीकार करने और उनका सम्मान करने की प्रवृत्ति भी बढ़ रही है।
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