ऑस्ट्रेलिया
कॉर्पोरेट जगत में शामिल होने पर 'अपनी पहचान से समझौते' के आरोपों पर बेन व्याट ने तोड़ी चुप्पी
ICN24 Newsroom 19 अग॰ 2026, 03:37 pm

पूर्व ट्रेजरर बेन व्याट ने कॉर्पोरेट ऑस्ट्रेलिया में शामिल होने पर अपनी स्वदेशी विरासत के साथ 'समझौता' करने के आरोपों का करारा जवाब दिया है।
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के पूर्व ट्रेजरर और प्रमुख स्वदेशी नेता बेन व्याट ने हाल ही में एक व्यावसायिक कार्यक्रम के दौरान उन आरोपों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है, जिनमें उन पर कॉर्पोरेट जगत में शामिल होकर अपनी सांस्कृतिक विरासत के साथ 'समझौता' करने का आरोप लगाया गया था। व्याट, जो वर्तमान में रियो टिंटो (Rio Tinto), वुडसाइड (Woodside), क्राउन (Crown) और वेस्ट कोस्ट ईगल्स (West Coast Eagles) जैसे बड़े संस्थानों के बोर्ड सदस्य हैं, ने कहा कि निर्णय लेने वाली मेज पर बैठना स्वदेशी समुदायों के लिए वास्तविक बदलाव लाने का सबसे प्रभावी तरीका है।
व्याट का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ऑस्ट्रेलिया के कॉर्पोरेट क्षेत्र में विविधता और समावेशिता को लेकर गहन चर्चा हो रही है। उनके आलोचकों का तर्क रहा है कि बड़े खनन और ऊर्जा निगमों में शामिल होकर उन्होंने अपनी उन जड़ों को पीछे छोड़ दिया है जो अक्सर इन उद्योगों के साथ संघर्षरत रहती हैं। हालांकि, व्याट ने इस धारणा को खारिज करते हुए तर्क दिया कि बाहरी व्यक्ति के रूप में विरोध करने के बजाय, संस्थानों के भीतर रहकर नीतियों को प्रभावित करना अधिक महत्वपूर्ण है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के संदर्भ में देखें तो व्याट का यह संघर्ष काफी परिचित लगता है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले प्रवासी समुदाय, विशेषकर भारतीय मूल के पेशेवर, अक्सर इसी तरह की दुविधा का सामना करते हैं। कॉर्पोरेट सीढ़ियां चढ़ते समय अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना और साथ ही मुख्यधारा के व्यावसायिक ढांचे में फिट होना एक बड़ी चुनौती रही है। जिस तरह व्याट 'प्रतिनिधित्व' की वकालत कर रहे हैं, उसी तरह भारतीय समुदाय भी ऑस्ट्रेलिया के बोर्डरूम में अधिक विविधता और अपनी बात रखे जाने की मांग करता रहा है।
व्याट ने श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि जब एक अल्पसंख्यक समुदाय का व्यक्ति सत्ता के गलियारों में पहुंचता है, तो उसे अक्सर संदेह की दृष्टि से देखा जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी उपस्थिति इन कंपनियों को स्वदेशी भूमि अधिकारों और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति अधिक संवेदनशील बनाने में मदद करती है। उन्होंने उदाहरण दिया कि रियो टिंटो जैसे संस्थानों में उनके होने से उन ऐतिहासिक गलतियों को सुधारने की प्रक्रिया में तेजी आती है, जो अतीत में समुदायों और कॉर्पोरेट्स के बीच विवाद का कारण बनी थीं।
यह मामला न केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व के बारे में है, बल्कि यह ऑस्ट्रेलिया के बदलते सामाजिक ढांचे को भी दर्शाता है। व्यावसायिक जगत अब यह समझने लगा है कि केवल 'टोकेनिज्म' (दिखावे के लिए प्रतिनिधित्व) से काम नहीं चलेगा। बेन व्याट जैसे अनुभवी नेताओं की मौजूदगी यह सुनिश्चित करती है कि कॉर्पोरेट रणनीतियों में विविधता केवल एक कागजी शब्द न रहकर नीतिगत निर्णय का हिस्सा बने। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई पेशेवरों के लिए भी यह एक सकारात्मक संदेश है कि अपनी पहचान के साथ समझौता किए बिना शीर्ष पदों पर पहुंचना न केवल संभव है, बल्कि आवश्यक भी है।
अंततः, व्याट का रुख यह स्पष्ट करता है कि आर्थिक शक्ति और सांस्कृतिक गौरव साथ-साथ चल सकते हैं। उन्होंने युवा पीढ़ी को प्रेरित करते हुए कहा कि वे बोर्डरूम में जाने से न डरें, क्योंकि वहीं से वे अपने समुदाय के भविष्य को आकार दे सकते हैं।
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