राजनीति
शेख हसीना की स्वदेश वापसी के संकेतों पर बांग्लादेश के प्रमुख राजनीतिक दलों की तीखी प्रतिक्रिया
ICN24 Newsroom 11 जुल॰ 2026, 06:31 pm

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बांग्लादेश लौटने के संकेतों ने ढाका में राजनीतिक सरगर्मी तेज कर दी है, जहाँ बीएनपी और जमात ने कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
बांग्लादेश की सत्ताच्युत प्रधानमंत्री शेख हसीना द्वारा देश वापस लौटने और अपनी राजनीतिक सक्रियता पुनः शुरू करने के संकेतों ने पड़ोसी देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। ढाका में मौजूद प्रमुख राजनीतिक दलों ने हसीना के इन संभावित इरादों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। मुख्य विपक्षी दल और वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में प्रभावी भूमिका निभा रही बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने स्पष्ट किया है कि यदि हसीना वापस आती हैं, तो उन्हें सबसे पहले देश की न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना होगा।
बीएनपी के वरिष्ठ नेताओं का तर्क है कि शेख हसीना के शासनकाल के दौरान हुए कथित मानवाधिकारों के उल्लंघन और भ्रष्टाचार के मामलों के लिए उनकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। पार्टी के प्रवक्ताओं ने कहा कि 'लोकतंत्र में कानून से ऊपर कोई नहीं है' और पूर्व प्रधानमंत्री को उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए विवादास्पद निर्णयों के लिए अदालत में खड़ा किया जाना चाहिए। बीएनपी ने यह भी संकेत दिया है कि हसीना की वापसी से देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है, जिसे संभालने की जिम्मेदारी वर्तमान अंतरिम ढांचे पर है।
वहीं, बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी ने शेख हसीना के बयानों को एक 'गहरी राजनीतिक साजिश' करार दिया है। जमात के नेतृत्व का आरोप है कि हसीना विदेशी धरती से बैठकर देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रही हैं। पार्टी ने चेतावनी दी है कि जनता उन ताकतों को फिर से स्वीकार नहीं करेगी जिन्होंने दमनकारी नीतियों का सहारा लिया था। जमात-ए-इस्लामी के अनुसार, हसीना की वापसी के संकेत केवल समर्थकों का मनोबल बढ़ाने की एक कोशिश है, जबकि धरातल पर उनकी स्वीकार्यता खत्म हो चुकी है।
इस राजनीतिक घटनाक्रम का प्रभाव केवल बांग्लादेश तक सीमित नहीं है, बल्कि ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय और दक्षिण एशियाई समुदायों में भी इसकी गूँज सुनाई दे रही है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई नागरिक, जिनके परिवार और व्यापारिक हित दक्षिण एशिया से जुड़े हैं, इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का सीधा असर क्षेत्रीय सुरक्षा और प्रवासी समुदायों के बीच आपसी संबंधों पर पड़ता है। सामुदायिक विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश में राजनीतिक अनिश्चितता से शरणार्थी संकट और सीमा सुरक्षा जैसी चुनौतियां दोबारा उत्पन्न हो सकती हैं, जो ऑस्ट्रेलिया की विदेश नीति के दृष्टिकोण से भी संवेदनशील है।
फिलहाल, बांग्लादेश में अंतरिम प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। शेख हसीना के समर्थकों और विरोधियों के बीच टकराव की आशंका को देखते हुए ढाका और अन्य प्रमुख शहरों में सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि अवामी लीग की नेता के इन संकेतों का क्या परिणाम निकलता है, लेकिन फिलहाल बांग्लादेश के अन्य राजनीतिक दल उनकी वापसी के रास्ते में कानूनी और राजनीतिक बाधाएं खड़ी करने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रहे हैं।
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