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बागपत: श्रावणी मेले के दूसरे दिन पुरा महादेव मंदिर में उमड़ी कांवड़ियों की भारी भीड़, लाखों ने किया जलाभिषेक
ICN24 Newsroom 10 अग॰ 2026, 06:38 pm

उत्तर प्रदेश के बागपत में ऐतिहासिक पुरा महादेव मंदिर में श्रावणी मेले के दूसरे दिन लाखों श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में स्थित ऐतिहासिक पुरा महादेव मंदिर में श्रावणी मेले के दूसरे दिन आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। सावन के पवित्र महीने के चलते लाखों की संख्या में कांवड़िए और स्थानीय श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए कतारों में खड़े नजर आए। पूरा क्षेत्र 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयघोष से गुंजायमान रहा। प्रशासन के अनुसार, मेले के शुरुआती दो दिनों में ही श्रद्धालुओं की संख्या लाखों को पार कर गई है, जिसे देखते हुए सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं।
पुरा महादेव मंदिर का इतिहास काफी प्राचीन माना जाता है और मान्यता है कि यहाँ जलाभिषेक करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान से बड़ी संख्या में शिव भक्त हरिद्वार और ऋषिकेश से गंगाजल लेकर यहाँ पहुँच रहे हैं। लंबी कतारों के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है। ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी के जरिए भीड़ पर पैनी नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
स्थानीय प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बैरिकेडिंग और पेयजल की व्यवस्था की है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी मेले परिसर में तैनात हैं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने स्वयं मौके पर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। कांवड़ मार्ग पर भारी वाहनों का प्रवेश वर्जित कर दिया गया है ताकि पैदल चल रहे शिव भक्तों को कोई असुविधा न हो। जगह-जगह भंडारों का आयोजन किया जा रहा है, जहाँ स्वयंसेवकों द्वारा कांवड़ियों की सेवा की जा रही है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी सावन का महीना विशेष महत्व रखता है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में स्थित हिंदू मंदिरों में इन दिनों विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है। हालांकि ऑस्ट्रेलिया में बागपत जैसा विशाल मेला नहीं लगता, लेकिन वहां के मंदिरों में होने वाले अनुष्ठान प्रवासी भारतीयों को उनकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखते हैं। सिडनी के श्री शिव मंदिर जैसे स्थानों पर भी सावन के दौरान जलाभिषेक के लिए भक्तों की लंबी कतारें देखी जाती हैं, जो इस बात का प्रतीक है कि भौगोलिक दूरियां भी भारतीय परंपराओं और श्रद्धा को कम नहीं कर सकतीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष श्रावणी मेले में श्रद्धालुओं की संख्या पिछले वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ सकती है। मंदिर समिति और जिला प्रशासन समन्वय के साथ काम कर रहे हैं ताकि आने वाले मुख्य पर्व के दिन भीड़ का प्रबंधन सुचारू रूप से किया जा सके। कांवड़ यात्रा न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह सांप्रदायिक सौहार्द और सेवा भाव का भी एक बड़ा उदाहरण पेश करती है, जहाँ समाज के हर वर्ग के लोग कांवड़ियों की मदद के लिए आगे आते हैं।
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