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ऑस्ट्रेलिया: आउटबैक नरसंहार स्थल पर पुलिस के संबोधन ने सबको चौंकाया, पूर्वजों के वंशजों के सामने स्वीकारी ऐतिहासिक गलती

ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 09:09 pm
ऑस्ट्रेलिया: आउटबैक नरसंहार स्थल पर पुलिस के संबोधन ने सबको चौंकाया, पूर्वजों के वंशजों के सामने स्वीकारी ऐतिहासिक गलती

ऑस्ट्रेलियाई पुलिस ने एक ऐतिहासिक नरसंहार स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में पूर्वजों के वंशजों से माफी मांगी और अतीत की क्रूरताओं पर खेद व्यक्त किया।

ऑस्ट्रेलिया के दूरदराज के इलाकों (आउटबैक) में दशकों पहले हुए नरसंहार के एक स्थल पर आयोजित शोक सभा में पुलिस के एक भावुक संबोधन ने वहां मौजूद लोगों को स्तब्ध कर दिया। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि वे अतीत में हुई उन हिंसक घटनाओं पर ‘गर्व नहीं’ करते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में मूल निवासियों की जान गई थी। यह कार्यक्रम उस स्थान पर आयोजित किया गया था जहां दशकों पहले ऑस्ट्रेलियाई पुलिस और औपनिवेशिक ताकतों द्वारा नरसंहार को अंजाम दिया गया था। इस कार्यक्रम में रॉनी नामक एक व्यक्ति भी शामिल थे, जिनके परदादा ने उसी क्षेत्र की एक नदी के किनारे से अपने पूर्वजों की हड्डियों और दांतों को इकट्ठा किया था। रॉनी की कहानी उस गहरे दर्द और आघात को दर्शाती है जिसे ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासी (Indigenous Australians) पीढ़ियों से सहते आ रहे हैं। इस स्थल पर पुलिस की मौजूदगी और उनका यह बयान कि विभाग अपने इतिहास के इस काले पन्ने पर शर्मिंदा है, एक बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। ऐतिहासिक रूप से, ऑस्ट्रेलिया में 'फ्रंटियर वॉर्स' (Frontier Wars) के दौरान पुलिस और स्थानीय निवासियों के बीच संघर्ष के कई मामले दर्ज हैं, लेकिन पुलिस द्वारा सीधे तौर पर जिम्मेदारी स्वीकार करना दुर्लभ रहा है। सभा को संबोधित करते हुए अधिकारियों ने कहा कि ऐतिहासिक सच्चाई को स्वीकार किए बिना भविष्य की ओर बढ़ना संभव नहीं है। उन्होंने स्वीकार किया कि अतीत की उन कार्रवाइयों ने न केवल जानें लीं, बल्कि परिवारों और संस्कृतियों को भी नष्ट कर दिया। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह घटनाक्रम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया में बसने वाले प्रवासियों के लिए यहां के मूल निवासियों के इतिहास और उनके संघर्षों को समझना सामाजिक एकीकरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत का स्वयं का औपनिवेशिक इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम की यादें इस तरह के माफीनामे और ऐतिहासिक न्याय की दिशा में उठाए गए कदमों के प्रति सहानुभूति पैदा करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संबोधन न केवल सुलह (Reconciliation) की प्रक्रिया को मजबूत करते हैं, बल्कि आधुनिक पुलिस बल और समुदाय के बीच विश्वास बहाली का काम भी करते हैं। हालांकि, कई वंशजों का मानना है कि केवल शब्दों से घाव नहीं भरेंगे और इसके लिए ठोस नीतिगत बदलावों की आवश्यकता है। यह आयोजन न केवल शोक का अवसर था, बल्कि ऑस्ट्रेलिया के 'अंधेरे अतीत' का सामना करने की एक सामूहिक कोशिश भी थी।
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