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ऑस्ट्रेलिया में प्रवासियों की संख्या में भारी गिरावट: महामारी के बाद के रिकॉर्ड स्तर से नीचे आए आंकड़े

ICN24 Newsroom 29 जुल॰ 2026, 05:35 am
ऑस्ट्रेलिया में प्रवासियों की संख्या में भारी गिरावट: महामारी के बाद के रिकॉर्ड स्तर से नीचे आए आंकड़े

ऑस्ट्रेलिया में प्रवासियों के आगमन में बड़ी कमी दर्ज की गई है। महामारी के बाद रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचने के बाद अब प्रवासन के आंकड़ों में गिरावट आ रही है, जिसका असर भारतीय समुदाय पर भी पड़ेगा।

ऑस्ट्रेलिया में प्रवासन को लेकर चल रही राजनीतिक गहमागहमी के बीच ताज़ा आंकड़ों ने एक नई बहस छेड़ दी है। हालिया विश्लेषणों से पता चलता है कि कोविड-19 महामारी के बाद सीमाओं के खुलने पर प्रवासियों की संख्या में जो भारी उछाल देखा गया था, अब उसमें तेज़ गिरावट आई है। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब अल्बनीज़ सरकार देश की प्रवासन प्रणाली में बड़े सुधार लागू कर रही है और नेट ओवरसीज माइग्रेशन (NOM) को नियंत्रित करने के प्रयास कर रही है। आंकड़ों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय छात्रों और अस्थायी वीज़ा धारकों के आगमन में आई कमी इस गिरावट का मुख्य कारण है। महामारी के ठीक बाद, ऑस्ट्रेलिया में प्रवासियों की संख्या ने 5,00,000 के ऐतिहासिक स्तर को पार कर लिया था, जिससे आवास और बुनियादी ढाँचे पर दबाव को लेकर चिंताएँ बढ़ गई थीं। हालांकि, अब यह स्पष्ट है कि प्रवासन का वह 'कैच-अप' चरण समाप्त हो गया है और संख्या अब सामान्य की ओर लौट रही है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। भारत, ऑस्ट्रेलिया के लिए कुशल प्रवासियों और अंतरराष्ट्रीय छात्रों का सबसे बड़ा स्रोत रहा है। प्रवासन के स्तर में आ रही यह कमी और वीज़ा नियमों में सख्ती का सीधा प्रभाव उन हज़ारों भारतीय छात्रों पर पड़ सकता है जो ऑस्ट्रेलिया में उच्च शिक्षा का सपना देख रहे हैं। सरकार ने हाल ही में 'जेनुइन स्टूडेंट टेस्ट' और अंग्रेजी भाषा की उच्च आवश्यकताओं जैसे कदम उठाए हैं, जिनका उद्देश्य प्रवासियों की संख्या को आधा करना है। विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया है कि प्रवासन का स्तर अभी भी बहुत अधिक है, जो देश के आवास संकट को और गहरा कर रहा है। वहीं, गृह मंत्रालय का तर्क है कि नई नीतियों का असर अब दिखने लगा है और आने वाले महीनों में प्रवासियों की संख्या में और भी कमी आएगी। प्रवासन विशेषज्ञों का मानना है कि प्रवासन में यह गिरावट न केवल नीतिगत बदलावों का परिणाम है, बल्कि यह इस बात का भी संकेत है कि श्रम बाज़ार में मांग अब संतुलित हो रही है। निष्कर्ष के तौर पर, ऑस्ट्रेलिया एक ऐसी प्रवासन प्रणाली की ओर बढ़ रहा है जो 'गुणवत्ता' पर अधिक और 'संख्या' पर कम केंद्रित है। भारतीय पेशेवरों और छात्रों के लिए, इसका मतलब है कि अब वीज़ा आवेदन प्रक्रिया पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण और प्रतिस्पर्धी होगी। ICN24 इस बदलाव पर अपनी नज़र बनाए रखेगा ताकि भारतीय प्रवासियों को हर महत्वपूर्ण अपडेट समय पर मिलता रहे।
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