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अमेरिकी शरण प्रणाली के दुरुपयोग पर बड़ा खुलासा: पूर्व जज ने कांग्रेस की सुनवाई में दी विस्फोटक गवाही
ICN24 Newsroom 13 जून 2026, 05:31 am
एक पूर्व आव्रजन न्यायाधीश ने अमेरिकी कांग्रेस के समक्ष गवाही देते हुए कहा कि शरण प्रणाली का व्यापक दुरुपयोग हो रहा है, जिससे वास्तविक पीड़ितों के बजाय आर्थिक प्रवासियों को लाभ मिल रहा है।
वाशिंगटन: संयुक्त राज्य अमेरिका की शरण प्रणाली (Asylum System) को लेकर एक पूर्व आव्रजन न्यायाधीश की गवाही ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। अमेरिकी कांग्रेस की एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान, पूर्व न्यायाधीश मैथ्यू ओ'ब्रायन ने दावा किया कि वर्तमान आव्रजन नीतियों में 'अराजकता और माफी' का बोलबाला है, जिससे शरण के मूल उद्देश्य को गहरा धक्का लगा है।
'एमनेस्टी एंड केओस: एब्यूज ऑफ यूएस इमिग्रेशन पॉलिसी' शीर्षक वाली इस सुनवाई में ओ'ब्रायन ने विस्तार से बताया कि कैसे अमेरिकी शरण सुरक्षा, जो मूल रूप से विशिष्ट उत्पीड़न से बचने वालों के लिए बनाई गई थी, अब उन लोगों तक फैल गई है जो केवल खराब आर्थिक परिस्थितियों या बेहतर जीवन की तलाश में आ रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि शरण का दावा करना अब इतना आसान हो गया है कि यह प्रणाली अपनी गरिमा खो रही है।
पूर्व न्यायाधीश के अनुसार, वर्तमान प्रक्रिया में कानूनी खामियों का फायदा उठाकर बड़ी संख्या में प्रवासी सीमा पार कर रहे हैं। उन्होंने गवाही दी कि कई लोग केवल 'डर' का दावा करके प्रवेश पा लेते हैं, जिसकी बाद में पुष्टि करना मुश्किल होता है। यह मुद्दा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका में भारतीय प्रवासियों की संख्या भी बढ़ रही है, जिनमें से कुछ अवैध मार्गों या शरण के दावों का उपयोग करने के प्रयास में पकड़े गए हैं।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर एक चेतावनी के रूप में देखी जा रही है। ऑस्ट्रेलिया ने भी हाल के वर्षों में अपनी सीमा सुरक्षा नीतियों को कड़ा किया है। अमेरिका की तरह, ऑस्ट्रेलिया में भी 'फेक रिफ्यूजी' दावों को लेकर बहस होती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका अपनी नीतियों को और सख्त करता है, तो इसका असर वैश्विक आव्रजन प्रवृत्तियों पर पड़ेगा, जिससे ऑस्ट्रेलिया जाने के इच्छुक भारतीयों के लिए भी वीज़ा नियमों में बदलाव आ सकता है।
अमेरिकी सांसदों ने इस गवाही पर चिंता व्यक्त की है। रिपब्लिकन सदस्यों ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है, जबकि कुछ अन्य ने इसे मानवीय दृष्टिकोण से देखने का आग्रह किया है। हालांकि, ओ'ब्रायन का तर्क है कि जब प्रणाली का दुरुपयोग होता है, तो वे लोग सबसे ज्यादा पीड़ित होते हैं जो वास्तव में युद्ध या नरसंहार से भाग रहे हैं और जिन्हें सुरक्षा की तत्काल आवश्यकता है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर के लोकतांत्रिक देश आव्रजन और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। भारतीय समुदाय, जो आमतौर पर कानूनी और कौशल-आधारित आव्रजन (Skilled Migration) का समर्थक रहा है, इस बदलाव को बारीकी से देख रहा है क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'इमिग्रेशन' की छवि को प्रभावित करता है।
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