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अगरतला का एमबीबी हवाई अड्डा बना पूर्वोत्तर का प्रमुख केंद्र, 12 वर्षों में दोगुने हुए यात्री
ICN24 Newsroom 14 जून 2026, 01:01 am

अगरतला के महाराजा बीर बिक्रम (MBB) हवाई अड्डे पर यात्रियों की संख्या 2014 के 8 लाख से बढ़कर 2025-26 तक 15 लाख पहुंचने का अनुमान है।
त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में स्थित महाराजा बीर बिक्रम (एमबीबी) हवाई अड्डे ने पिछले एक दशक में नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में इस हवाई अड्डे पर यात्रियों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। यह विकास न केवल त्रिपुरा बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत के लिए कनेक्टिविटी के एक नए युग का संकेत है।
एक हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, हवाई अड्डा निदेशक के.एम. नेहरा ने बताया कि नए टर्मिनल भवन के उद्घाटन के बाद हवाई अड्डे के उपयोग में भारी उछाल आया है। उन्होंने कहा कि साल 2014 में जहां सालाना यात्रियों की संख्या लगभग 8 लाख थी, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 तक इसके बढ़कर 15 लाख होने की उम्मीद है। वर्तमान में, एमबीबी हवाई अड्डा गुवाहाटी के बाद पूर्वोत्तर भारत का दूसरा सबसे व्यस्त हवाई अड्डा बन गया है।
कनेक्टिविटी के विस्तार पर चर्चा करते हुए नेहरा ने बताया कि 2014 में हवाई संचालन केवल गुवाहाटी और कोलकाता तक ही सीमित था। हालांकि, अब यह परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। आज अगरतला सीधे तौर पर बेंगलुरु, हैदराबाद, इंफाल और बागडोगरा जैसे प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। प्रतिदिन यहां से लगभग 34 उड़ानें संचालित होती हैं, जो करीब 5,000 यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाती हैं।
हवाई अड्डा प्रशासन अब मुंबई और चेन्नई के लिए सीधी उड़ान सेवाएं शुरू करने पर विचार कर रहा है। नेहरा के अनुसार, इन शहरों में बड़ी संख्या में छात्र और पेशेवर रहते हैं, जिन्हें वर्तमान में कनेक्टिंग फ्लाइट्स पर निर्भर रहना पड़ता है। इसके अलावा, यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए 'डिजी यात्रा' (DG Yatra) जैसी डिजिटल सेवाओं की शुरुआत की गई है, जिससे हवाई अड्डे पर प्रवेश और सुरक्षा जांच की प्रक्रिया काफी सुगम हो जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संदर्भ में, निदेशक ने स्पष्ट किया कि बुनियादी ढांचा पूरी तरह तैयार है। नए टर्मिनल में इमिग्रेशन, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय आगमन-प्रस्थान के लिए अलग से व्यवस्था की गई है। सरकार से मंजूरी मिलते ही अंतरराष्ट्रीय परिचालन किसी भी समय शुरू किया जा सकता है। इसके साथ ही, ऊनाकोटी जिले के कैलाशहर हवाई अड्डे को पुनः सक्रिय करने की योजना पर भी काम चल रहा है, जिसके लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) ने राज्य सरकार से अतिरिक्त भूमि की मांग की है।
यह विकास उन प्रवासी भारतीयों के लिए भी महत्वपूर्ण है जो ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में रहते हैं और अपने गृह राज्य त्रिपुरा का दौरा करते हैं। बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक सुविधाएं अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए यात्रा को अधिक आरामदायक और समय की बचत करने वाली बनाती हैं।
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