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अधिक भानु सप्तमी 2024: सूर्य देव की कृपा पाने के लिए करें ये 5 विशेष कार्य, घर में आएगी सुख-समृद्धि
ICN24 Newsroom 7 जून 2026, 02:30 pm
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7 जून को मनाई जाने वाली अधिक भानु सप्तमी पर सूर्य उपासना का विशेष महत्व है। जानें वे 5 कार्य जो आपके जीवन में उन्नति और सौभाग्य ला सकते हैं।
सनातन धर्म में सूर्य उपासना का विशेष महत्व है, और जब भानु सप्तमी 'अधिक मास' के दौरान आती है, तो इसका आध्यात्मिक फल कई गुना बढ़ जाता है। इस वर्ष 7 जून को अधिक भानु सप्तमी मनाई जा रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार, रविवार के दिन पड़ने वाली सप्तमी तिथि को भानु सप्तमी कहा जाता है। यह दिन प्रत्यक्ष देवता सूर्य नारायण को समर्पित है, जो न केवल ऊर्जा के स्रोत हैं, बल्कि आरोग्य और सफलता के कारक भी माने जाते हैं।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी इस दिन का विशेष महत्व है। सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे शहरों में स्थित हिंदू मंदिरों में इस अवसर पर विशेष प्रार्थनाओं का आयोजन किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन कुछ विशेष कार्य करने से व्यक्ति के जीवन से दरिद्रता दूर होती है और सुख-समृद्धि के द्वार खुलते हैं।
पहला और सबसे महत्वपूर्ण कार्य 'अर्घ्य दान' है। सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, अक्षत और लाल पुष्प डालकर सूर्य देव को अर्ध्य देना चाहिए। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से शुभ है, बल्कि एकाग्रता और आत्मविश्वास बढ़ाने में भी सहायक माना जाता है। दूसरा कार्य है 'आदित्य हृदय स्तोत्र' का पाठ। मान्यता है कि भगवान राम ने भी रावण पर विजय प्राप्त करने से पहले इस स्तोत्र का पाठ किया था। व्यवसाय में बाधाओं का सामना कर रहे लोगों के लिए यह अत्यंत लाभकारी है।
तीसरा कार्य दान-पुण्य से संबंधित है। भानु सप्तमी के दिन गेहूं, तांबा, गुड़ या लाल वस्त्र का दान करना चाहिए। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले श्रद्धालु स्थानीय चैरिटी या मंदिरों के माध्यम से यह सेवा कर सकते हैं। चौथा कार्य 'गाय की सेवा' है। हिंदू धर्म में गाय को पूजनीय माना गया है। इस दिन गाय को हरा चारा या गुड़ खिलाने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है।
पांचवां और अंतिम कार्य है सात्विक जीवन शैली और मौन व्रत का पालन। इस दिन नमक का त्याग करना और केवल फलाहार करना शारीरिक शुद्धि के साथ-साथ मानसिक शांति प्रदान करता है। प्रवासी भारतीयों के लिए अपनी व्यस्त जीवनशैली के बीच इस तरह के अनुष्ठान आध्यात्मिक जड़ों से जुड़े रहने का एक सशक्त माध्यम बनते हैं। ज्योतिषियों का मानना है कि जो जातक इन नियमों का श्रद्धापूर्वक पालन करते हैं, उन्हें करियर में उन्नति और स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है।
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