राजनीति
अभिजीत दिपके का भाजपा पर तीखा हमला: 'सत्ता की भूख में देश और युवाओं को भूली सरकार'
ICN24 Newsroom 30 जुल॰ 2026, 10:36 pm
CJP नेता अभिजीत दिपके ने भाजपा पर केवल सत्ता के लिए राजनीति करने का आरोप लगाया है, उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य की अनदेखी कर रही है।
भारत की राजनीति में बयानबाजियों का दौर एक बार फिर तेज हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता अभिजीत दिपके ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए एक तीखा हमला बोला है। दिपके का सीधा आरोप है कि भाजपा का एकमात्र लक्ष्य किसी भी तरह सत्ता में बने रहना है और उसे देश के भविष्य या युवाओं की वास्तविक समस्याओं से कोई लेना-देना नहीं है। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है।
भारतीय राजनीति के मौजूदा परिदृश्य में, विपक्षी दलों द्वारा भाजपा पर 'सत्ता-केंद्रित' होने के आरोप नए नहीं हैं, लेकिन दिपके का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत में रोजगार और आर्थिक नीतियों को लेकर गहन मंथन चल रहा है। दिपके ने तर्क दिया कि सरकार की प्राथमिकताएं अब जनहित से हटकर केवल चुनाव जीतने और गठबंधन की राजनीति को साधने तक सीमित हो गई हैं। उन्होंने कहा कि देश के संसाधन और नीतियां विकास के बजाय राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय (Indian-Australian community) के लिए भारत की ये राजनीतिक हलचलें काफी मायने रखती हैं। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी भारतीय (NRIs) न केवल भारत की अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं, बल्कि वे भारत की लोकतांत्रिक छवि और वहां की स्थिरता को लेकर भी हमेशा चिंतित रहते हैं। दिपके जैसे नेताओं के तीखे बयान प्रवासी भारतीयों के बीच भी चर्चा का विषय बनते हैं, क्योंकि वे अपने गृह देश में एक जवाबदेह और पारदर्शी शासन व्यवस्था देखना चाहते हैं।
दिपके ने अपने संबोधन में विशेष रूप से भारत के युवाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है, जिसे 'जनसांख्यिकीय लाभांश' कहा जाता है, लेकिन मौजूदा सरकार इस क्षमता का उपयोग करने के बजाय युवाओं को राजनीतिक ध्रुवीकरण के जाल में उलझा रही है। उनके अनुसार, युवाओं को आज रोजगार के वास्तविक अवसर और बेहतर शिक्षा की आवश्यकता है, न कि केवल चुनावी वादों और भावनात्मक नारों की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के कड़े हमलों से आगामी चुनावी सत्रों से पहले राजनीतिक ध्रुवीकरण और बढ़ने की संभावना है। जहाँ एक तरफ भाजपा अपनी कल्याणकारी योजनाओं को राष्ट्र-निर्माण का आधार बताती है, वहीं दिपके जैसे विपक्षी नेता इसे केवल सत्ता बचाने का एक मुखौटा करार दे रहे हैं। आईएनसी24 के पाठकों के लिए, यह खबर भारत की बदलती राजनीतिक नब्ज को समझने का एक जरिया है, जहाँ सत्ता और सेवा के बीच का संघर्ष लगातार गहराता जा रहा है।
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