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तिहाड़ जेल में 50 दिनों से 'अनशन' पर अमेरिकी कैदी: वैन डाइक ने भारतीय खाने को बताया सेहत के लिए खतरा

ICN24 Newsroom 9 जुल॰ 2026, 11:31 pm
तिहाड़ जेल में 50 दिनों से 'अनशन' पर अमेरिकी कैदी: वैन डाइक ने भारतीय खाने को बताया सेहत के लिए खतरा

तिहाड़ जेल में बंद अमेरिकी नागरिक वैन डाइक ने पिछले 50 दिनों से जेल का खाना नहीं खाया है, जिससे प्रशासन के सामने स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

देश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली दिल्ली की तिहाड़ जेल इन दिनों एक अनोखी चुनौती का सामना कर रही है। यहां बंद एक अमेरिकी नागरिक, जिसका नाम वैन डाइक बताया जा रहा है, ने पिछले 50 दिनों से जेल के राशन से तैयार भोजन को हाथ भी नहीं लगाया है। वैन डाइक का दावा है कि भारतीय जेलों में मिलने वाला खाना उसकी शारीरिक बनावट और स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त नहीं है। इस मामले ने जेल प्रशासन की नींद उड़ा दी है, क्योंकि लंबे समय तक भोजन न करने से कैदी के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। वैन डाइक का कहना है कि तिहाड़ जेल में परोसा जाने वाला भोजन अत्यधिक मसालेदार और तैलीय (तला-भुना) होता है। अमेरिकी नागरिक के अनुसार, वह बचपन से ही इस तरह के भोजन का अभ्यस्त नहीं रहा है और भारतीय जेल का खाना खाने के बाद उसे पाचन संबंधी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। वैन डाइक का तर्क है कि उसे उसकी सेहत और आहार संबंधी जरूरतों के हिसाब से पश्चिमी शैली का सादा भोजन दिया जाना चाहिए। जेल सूत्रों के मुताबिक, हालांकि कैदी ने जेल का आधिकारिक भोजन लेने से मना कर दिया है, लेकिन वह पूरी तरह से भूखा नहीं है। वह जेल की कैंटीन से मिलने वाले फल, बिस्कुट, दूध और ब्रेड जैसी चीजों पर निर्भर है। हालांकि, प्रशासन के लिए चिंता का विषय यह है कि केवल कैंटीन के सूखे भोजन और फलों पर इतने लंबे समय तक निर्भर रहना किसी भी व्यक्ति के पोषण संतुलन को बिगाड़ सकता है। प्रशासन को डर है कि यदि कैदी की तबीयत बिगड़ती है, तो यह एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बन सकता है। भारत की उच्च-सुरक्षा जेलों में विदेशी कैदियों के खान-पान और मानवाधिकारों को लेकर अक्सर बहस होती रही है। अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल और जेल मैनुअल के अनुसार, विदेशी नागरिकों को उनकी आहार संबंधी प्राथमिकताओं के आधार पर कुछ रियायतें दी जा सकती हैं, लेकिन जेल प्रशासन के लिए हर कैदी की व्यक्तिगत पसंद के अनुसार भोजन तैयार करना व्यावहारिक रूप से असंभव है। तिहाड़ प्रशासन वर्तमान में चिकित्सा विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श कर रहा है ताकि इस समस्या का कोई मध्यम मार्ग निकाला जा सके। यह मामला केवल एक व्यक्ति के खाने की पसंद का नहीं है, बल्कि यह भारतीय कारागार प्रणाली में भोजन की गुणवत्ता और विदेशी कैदियों के प्रबंधन पर भी सवाल उठाता है। ऑस्ट्रेलिया और अन्य पश्चिमी देशों में बसे भारतीय समुदाय के लोग भी इस खबर को दिलचस्पी से देख रहे हैं, क्योंकि विदेशों में भारतीय प्रवासियों के साथ जेलों में होने वाले व्यवहार को लेकर भी अक्सर ऐसी ही चिंताएं जताई जाती हैं। फिलहाल, वैन डाइक अपनी जिद पर अड़ा है और प्रशासन उसे जेल का संतुलित भोजन लेने के लिए मनाने की कोशिश कर रहा है।
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