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बारामूला में प्रवासियों की जमीन हड़पने का मामला: आर्थिक अपराध शाखा ने 5 लोगों के खिलाफ दर्ज की FIR
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 06:40 am
कश्मीर की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने बारामूला में प्रवासियों की 14 कनाल से अधिक जमीन को फर्जी दस्तावेजों के जरिए हड़पने के आरोप में पांच लोगों पर मामला दर्ज किया है।
जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में प्रवासियों की भूमि से जुड़े एक बड़े भूमि घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। श्रीनगर स्थित आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने शुक्रवार को वाटरगाम इलाके में 14 कनाल और 3 मरला भूमि की अवैध खरीद-फरोख्त के आरोप में पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई तब की गई जब जांच में पाया गया कि आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों और धोखाधड़ी का सहारा लेकर प्रवासियों की बहुमूल्य संपत्ति को अपने नाम करने की कोशिश की थी।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, आर्थिक अपराध शाखा को इस संबंध में पुख्ता शिकायत मिली थी कि कुछ भू-माफिया और स्थानीय लोग मिलकर उन कश्मीरी प्रवासियों की जमीन को निशाना बना रहे हैं, जो घाटी से बाहर रह रहे हैं। जांच के दौरान यह सामने आया कि आरोपियों ने राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर की और मूल मालिकों की अनुपस्थिति का फायदा उठाते हुए जाली पावर ऑफ अटॉर्नी और अन्य दस्तावेज तैयार किए। इस मामले में पुलिस ने धारा 420, 467, 468 और 120-बी के तहत मामला दर्ज किया है।
यह घटना उन भारतीय प्रवासियों के लिए एक गंभीर चेतावनी है जो वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया या अन्य देशों में बसे हुए हैं लेकिन भारत, विशेषकर कश्मीर में उनकी पैतृक संपत्ति मौजूद है। कश्मीर में 'जम्मू-कश्मीर प्रवासी अचल संपत्ति (संरक्षण, संरक्षण और संकट बिक्री पर रोक) अधिनियम, 1997' लागू है, जो प्रवासियों की संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। हालांकि, जमीन की बढ़ती कीमतों और स्थानीय स्तर पर निगरानी की कमी के कारण अक्सर इस तरह के घोटाले सामने आते रहते हैं।
ऑस्ट्रेलियाई-भारतीय समुदाय के लिए, जो अक्सर अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए भारत में निवेश करते हैं या अपनी पैतृक संपत्ति को संजोकर रखना चाहते हैं, यह मामला कानूनी सतर्कता के महत्व को रेखांकित करता है। कानूनी विशेषज्ञों का सुझाव है कि विदेशों में रह रहे संपत्ति मालिकों को समय-समय पर अपने राजस्व रिकॉर्ड (जमाबंदी) की ऑनलाइन जांच करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी अनुपस्थिति में किसी भी प्रकार का अवैध उत्परिवर्तन (म्यूटेशन) न किया गया हो।
बारामूला प्रशासन और पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि क्या इस घोटाले में राजस्व विभाग के कुछ निचले स्तर के कर्मचारी भी शामिल थे। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और प्रवासियों की भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने की प्रक्रिया जारी रहेगी। कश्मीर में हाल के वर्षों में सरकार ने प्रवासी संपत्तियों की शिकायतों के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया है, जो विदेशों में रहने वाले लोगों के लिए अपनी शिकायतें दर्ज करने का एक प्रभावी माध्यम बन गया है।
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