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पार्किंसंस को केवल 'बुढ़ापे की बीमारी' मानने वालों के लिए मिसाल: 44 वर्षीय पॉल कोहेन की 1300 किमी की साहसी यात्रा

ICN24 Newsroom 4 जुल॰ 2026, 11:31 pm
पार्किंसंस को केवल 'बुढ़ापे की बीमारी' मानने वालों के लिए मिसाल: 44 वर्षीय पॉल कोहेन की 1300 किमी की साहसी यात्रा

पॉल कोहेन अपनी 1300 किलोमीटर की यात्रा के जरिए यह साबित करना चाहते हैं कि पार्किंसंस केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं है। जानिए उनकी संघर्ष और साहस की कहानी।

ऑस्ट्रेलिया के दुर्गम इलाकों (आउटबैक) की तपती सड़कों पर इन दिनों एक पिता अपने दृढ़ संकल्प की कहानी लिख रहा है। 44 वर्षीय पॉल कोहेन ने 1,300 किलोमीटर की लंबी सड़क यात्रा शुरू की है, जिसका उद्देश्य किसी रिकॉर्ड को तोड़ना नहीं, बल्कि एक गहरी सामाजिक धारणा को बदलना है। पॉल का मानना है कि पार्किंसंस रोग को लेकर समाज में यह गलतफहमी व्याप्त है कि यह केवल बुढ़ापे की बीमारी है। पॉल कोहेन को 'यंग-ऑनसेट पार्किंसंस' (कम उम्र में होने वाला पार्किंसंस) का पता तब चला जब वह अपने जीवन के सबसे सक्रिय दौर में थे। इस निदान ने न केवल उनके स्वास्थ्य बल्कि उनकी मानसिक स्थिति को भी चुनौती दी। आमतौर पर लोग पार्किंसंस का नाम सुनते ही कांपते हाथों वाले किसी बुजुर्ग की कल्पना करते हैं, लेकिन पॉल जैसे हजारों ऑस्ट्रेलियाई इस बात का सबूत हैं कि यह बीमारी युवाओं को भी अपना शिकार बना सकती है। अपनी इस यात्रा के माध्यम से वे इसी 'अदृश्य' संघर्ष को दुनिया के सामने लाना चाहते हैं। पॉल की यह 1300 किलोमीटर की यात्रा केवल शारीरिक सहनशक्ति का परीक्षण नहीं है, बल्कि यह उन लक्षणों के साथ सामंजस्य बैठाने की कोशिश है जो हर दिन बदलते रहते हैं। पार्किंसंस के मरीजों के लिए थकान, मांसपेशियों में अकड़न और संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौतियां होती हैं। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए भी पॉल की यह कहानी विशेष महत्व रखती है। हमारे समाज में अक्सर स्वास्थ्य संबंधी ऐसी समस्याओं को उम्र से जोड़कर देखा जाता है या फिर शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। पॉल का संदेश स्पष्ट है: जागरूकता ही वह पहला कदम है जो इस बीमारी के साथ गरिमापूर्ण जीवन जीने में मदद कर सकता है। ऑस्ट्रेलियाई आउटबैक की कठिन परिस्थितियों में गाड़ी चलाना अपने आप में एक चुनौती है, और पार्किंसंस के साथ यह और भी जटिल हो जाता है। पॉल का कहना है, "मैं यह दिखाना चाहता हूं कि निदान का मतलब जीवन का अंत नहीं है। आप अभी भी बड़े लक्ष्य निर्धारित कर सकते हैं और उन्हें पूरा कर सकते हैं।" उनकी यह मुहिम 'पार्किंसंस ऑस्ट्रेलिया' जैसे संगठनों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो इस बीमारी पर शोध और मरीजों की सहायता के लिए धन जुटा रहे हैं। पॉल कोहेन की इस यात्रा को स्थानीय समुदायों और सोशल मीडिया पर जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। वे न केवल अपने लिए बल्कि उन सभी लोगों के लिए आवाज उठा रहे हैं जो पार्किंसंस के साथ चुपचाप संघर्ष कर रहे हैं। इस साहसी यात्रा के अंत तक, पॉल को उम्मीद है कि लोग पार्किंसंस को एक नए नजरिए से देखेंगे—एक ऐसी स्थिति के रूप में जिसे साहस, सही उपचार और सामुदायिक समर्थन से चुनौती दी जा सकती है।
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