ऑस्ट्रेलिया
10 साल बाद भी न्याय की आस: पूर्व मरीन ट्रैविस मेसन की अनसुलझी हत्या की गुत्थी अब तक नहीं सुलझी
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 11:36 am
अमेरिका के अरोरा में एक औषधालय में डकैती के दौरान मारे गए पूर्व मरीन ट्रैविस मेसन के परिवार ने 10 साल बाद भी न्याय की उम्मीद नहीं छोड़ी है।
समय का पहिया निरंतर घूमता रहता है, लेकिन कुछ परिवारों के लिए वक्त एक दर्दनाक मोड़ पर ठहर जाता है। अमेरिका के अरोरा में पूर्व अमेरिकी मरीन दिग्गज ट्रैविस मेसन की हत्या को आज पूरे दस साल बीत चुके हैं, लेकिन उनके परिवार के लिए न्याय का इंतजार आज भी खत्म नहीं हुआ है। 2016 में एक औषधालय (डिस्पेंसरी) में सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करते समय मेसन की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आज एक दशक बाद भी, अरोरा पुलिस विभाग और मेसन का परिवार जनता से किसी भी ऐसी जानकारी के लिए अपील कर रहा है जो इस अनसुलझे मामले को सुलझाने में मदद कर सके।
ट्रैविस मेसन, जो एक समर्पित पिता और पति थे, अपनी शिफ्ट के दौरान दो नकाबपोश संदिग्धों का शिकार हुए थे। संदिग्धों ने लूटपाट के इरादे से डिस्पेंसरी में प्रवेश किया और इस दौरान हुई गोलीबारी में मेसन को अपनी जान गंवानी पड़ी। यह घटना न केवल स्थानीय समुदाय के लिए एक सदमा थी, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर सुरक्षा क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर विशेष महत्व रखती है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया में भारतीय प्रवासियों का एक बड़ा हिस्सा सुरक्षा (सिक्योरिटी) और रिटेल क्षेत्र में कार्यरत है, जहां अक्सर जोखिम भरा माहौल होता है।
मेसन की पत्नी, सामंथा मेसन, ने हाल ही में मीडिया से बात करते हुए अपनी पीड़ा साझा की। उन्होंने कहा कि उनके बच्चों ने अपने पिता के बिना एक लंबा समय बिताया है और वे आज भी यह नहीं जानते कि उस रात वास्तव में क्या हुआ था। अरोरा पुलिस ने इस मामले में कई सुरागों पर काम किया है, लेकिन ठोस सबूतों के अभाव में अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। पुलिस का मानना है कि आज भी समाज में ऐसे लोग मौजूद हैं जिनके पास उस रात की जानकारी हो सकती है, और शायद समय बीतने के साथ उनकी वफादारी बदली हो या वे अब बोलने के लिए तैयार हों।
ऑस्ट्रेलियाई परिप्रेक्ष्य में देखें तो, कार्यस्थल पर सुरक्षा और हिंसा की घटनाएं भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई पेशेवरों के लिए भी चिंता का विषय रही हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे बड़े शहरों में देर रात तक काम करने वाले सुरक्षाकर्मियों को अक्सर असामाजिक तत्वों का सामना करना पड़ता है। ट्रैविस मेसन का मामला हमें याद दिलाता है कि न्याय की प्रक्रिया कितनी भी लंबी क्यों न हो, सत्य की खोज कभी रुकनी नहीं चाहिए। स्थानीय अधिकारियों ने इस मामले में जानकारी देने वालों के लिए इनाम की घोषणा भी की है, इस उम्मीद में कि तकनीक और नए फॉरेंसिक साक्ष्य शायद इस 'कोल्ड केस' में नई जान फूंक सकें।
फिलहाल, मेसन का परिवार केवल यादों और न्याय की धुंधली उम्मीद के सहारे जी रहा है। यह मामला एक चेतावनी भी है और एक अपील भी—कि अपराधी चाहे कितनी भी कोशिश कर लें, समय की धूल न्याय की आवाज को दबा नहीं सकती। अरोरा पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह संदेश साझा किया है कि किसी भी छोटी से छोटी जानकारी को नजरअंदाज न किया जाए, क्योंकि वह एक परिवार को दस साल से प्रतीक्षित सुकून दिला सकती है।
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