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राजेश एक्सपोर्ट्स पर ईडी का बड़ा खुलासा: 7.7 लाख करोड़ का टर्नओवर, लेकिन MD की सैलरी मात्र 17,000 रुपये
ICN24 Newsroom 24 जून 2026, 04:12 pm
प्रवर्तन निदेशालय ने राजेश एक्सपोर्ट्स के वित्तीय दावों में भारी विसंगतियों का खुलासा किया है, जिसमें अधिकारियों के मामूली वेतन और अफ्रीकी निवेश पर सवाल उठाए गए हैं।
भारत की सबसे बड़ी स्वर्ण निर्यात कंपनियों में से एक, राजेश एक्सपोर्ट्स (Rajesh Exports), इन दिनों प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कड़ी जांच के दायरे में है। जांच एजेंसी ने कंपनी के वित्तीय आंकड़ों में ऐसी विसंगतियों का खुलासा किया है जिसने कॉर्पोरेट जगत को चौंका दिया है। फॉर्च्यून 500 सूची में शामिल होने का दावा करने वाली इस कंपनी का कुल टर्नओवर पिछले कुछ वर्षों में 7.7 लाख करोड़ रुपये बताया गया है, लेकिन इसके शीर्ष अधिकारियों का वेतन किसी साधारण कर्मचारी से भी कम पाया गया है।
ईडी की जांच रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के प्रबंध निदेशक (MD) राजेश मेहता प्रति माह केवल 17,000 रुपये का वेतन ले रहे हैं। इससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) का वेतन शून्य यानी 'जीरो' दिखाया गया है। एक ऐसी कंपनी जो वैश्विक स्तर पर व्यापार करने और अरबों के लेनदेन का दावा करती है, उसके शीर्ष अधिकारियों का यह वेतन ढांचा जांचकर्ताओं के गले नहीं उतर रहा है।
जांच में यह भी सामने आया है कि राजेश एक्सपोर्ट्स ने अफ्रीका में सोने की खदानों में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करने का दावा किया है। हालांकि, ईडी का कहना है कि इस निवेश के समर्थन में पर्याप्त दस्तावेज या भौतिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। एजेंसी को संदेह है कि यह निवेश केवल कागजों पर हो सकता है या इसका उपयोग धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के लिए किया गया हो सकता है। कंपनी के बयानों और वास्तविक वित्तीय स्थिति के बीच के इस 'पैराडॉक्स' ने निवेशकों और नियामकों के बीच चिंता पैदा कर दी है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया दुनिया के सबसे बड़े स्वर्ण उत्पादकों में से एक है और भारत के साथ इसके स्वर्ण व्यापार संबंध अत्यंत गहरे हैं। कई अनिवासी भारतीय (NRI) सोने को निवेश का एक सुरक्षित माध्यम मानते हैं और भारत की बड़ी ज्वेलरी फर्मों पर भरोसा करते हैं। राजेश एक्सपोर्ट्स जैसी बड़ी कंपनी में ऐसी अनियमितताएं न केवल बाजार की धारणा को प्रभावित करती हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार पारदर्शिता पर भी सवाल उठाती हैं।
ईडी के अधिकारियों का मानना है कि कंपनी द्वारा दिखाया गया विशाल टर्नओवर 'सर्कुलर ट्रेडिंग' का परिणाम हो सकता है, जहां धन और माल को बिना किसी वास्तविक मूल्यवर्धन के विभिन्न संबंधित संस्थाओं के बीच घुमाया जाता है। फिलहाल, जांच जारी है और आगामी हफ्तों में कंपनी की संपत्तियों की कुर्की और अन्य दंडात्मक कार्रवाइयां देखने को मिल सकती हैं। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला कॉर्पोरेट गवर्नेंस की विफलता का एक बड़ा उदाहरण बनकर उभर सकता है।
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